युद्ध के साये में घरेलू क्रूज और सुरक्षित देशों की ओर बढ़ा रुझान
रोहतक: इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक पर्यटन(Tourism) परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। सुरक्षा और खर्च को लेकर बढ़ी चिंताओं के कारण यात्रियों ने अब मिडिल ईस्ट के देशों की ओर रुख कम कर दिया है। जहाँ एक ओर पर्यटकों ने दुबई जैसे पारंपरिक क्रूज गंतव्यों से दूरी बनाना शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी ओर यूरोप(Europe) के देशों जैसे इटली, फ्रांस, स्विट्जरलैंड और फिनलैंड(Finland) के लिए बुकिंग में भारी उछाल देखा गया है। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका जैसे सुरक्षित माने जाने वाले नए गंतव्य भी यात्रियों की पहली पसंद बन रहे हैं।
घरेलू पर्यटन और लग्जरी क्रूज का क्रेज
अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का सबसे सकारात्मक असर भारतीय घरेलू पर्यटन पर पड़ा है। लोग अब दुबई की महँगी और असुरक्षित मानी जा रही यात्राओं के बजाय देश के भीतर ही लग्जरी क्रूज का अनुभव लेना पसंद कर रहे हैं। गोवा, मुंबई और केरल जैसे तटीय स्थलों के लिए क्रूज बुकिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू पर्यटन को मिल रहा यह बढ़ावा तब तक जारी रहेगा जब तक कि वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती। लोग अब कम लागत और आसान पहुंच के कारण घरेलू विकल्पों को सुरक्षित और बेहतर मान रहे हैं।
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हवाई यात्रा पर युद्ध का सीधा असर
युद्ध ने न केवल पर्यटन के रास्तों को बदला है, बल्कि हवाई यात्रा को भी काफी महंगा बना दिया है। सुरक्षा कारणों से एयरलाइंस ने अपने रूट में बदलाव किए हैं, जिससे अब उड़ानें अबू धाबी और दुबई के बजाय सीधे रूट से जा रही हैं। इसका सीधा असर किराए पर पड़ा है; जो टिकट पहले 60 से 70 हजार रुपए में मिल जाते थे, उनकी कीमत अब 1.20 लाख रुपए तक पहुँच गई है। यह बढ़ती लागत भी एक बड़ा कारण है कि यात्री अब विदेशी गंतव्यों की तुलना में सुरक्षित और सुलभ घरेलू पर्यटन को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
पर्यटक दुबई के बजाय घरेलू क्रूज को प्राथमिकता क्यों दे रहे हैं?
मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण पैदा हुई सुरक्षा चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय यात्रा की बढ़ती लागत के चलते लोग अब देश में ही लग्जरी क्रूज का अनुभव लेना पसंद कर रहे हैं। घरेलू क्रूज यात्रा कम खर्चीली, सुरक्षित और सुलभ विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है।
यूरोप की यात्रा वर्तमान में महंगी क्यों हो गई है?
युद्ध के कारण हवाई उड़ानों के रूट बदल दिए गए हैं। पहले उड़ानें दुबई और अबू धाबी के रास्ते जाती थीं, लेकिन अब सीधे रूट अपनाने के कारण विमान ईंधन और परिचालन लागत बढ़ गई है, जिससे टिकटों के दाम 60-70 हजार से बढ़कर 1.20 लाख रुपए तक पहुँच गए हैं।
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