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Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील

Dhanarekha
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Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील

व्यापार संबंधों में एक नए युग की शुरुआत

नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी है कि भारत और अमेरिका(Trade Deal) के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Deal) पर जॉइंट स्टेटमेंट अगले 4-5 दिनों में जारी और हस्ताक्षरित हो सकता है। यह इस डील का पहला चरण (First Tranche) होगा। इसके बाद, समझौते का औपचारिक कानूनी दस्तावेज मार्च के मध्य तक तैयार होने की उम्मीद है। यह डील वर्चुअल माध्यम से भी साइन की जा सकती है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार की नई राहें खुलेंगी

टैरिफ में कटौती और आर्थिक लाभ

इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय निर्यातकों को मिलेगा। जॉइंट स्टेटमेंट साइन होने के बाद अमेरिका भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ(Trade Deal) को घटाकर 18% कर देगा। बदले में, भारत भी कुछ अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों जैसे वाइन, ड्राई फ्रूट्स और ताजी सब्जियों पर टैरिफ कम या शून्य करेगा। गोयल के अनुसार, यह डील MSMEs, कुशल श्रमिकों और उद्यमियों के लिए बड़े अवसर पैदा करेगी और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को गति देगी।

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संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और ऊर्जा प्राथमिकता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र को इस डील में पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। पीयूष गोयल ने भरोसा दिलाया कि 140 करोड़ भारतीयों की खाद्य(Trade Deal) और ऊर्जा सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख किया है। खास बात यह है कि इस प्रारंभिक समझौते में कोई बड़ा निवेश निवेश प्रतिबद्धता शामिल नहीं है, जिससे भारत की आर्थिक संप्रभुता बनी रहेगी।

इस ट्रेड डील से भारतीय निर्यातकों को सीधा क्या फायदा होगा?

डील लागू होने के बाद अमेरिका भारतीय गुड्स(Trade Deal) पर लगने वाले भारी टैरिफ को घटाकर 18% कर देगा। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे कपड़ा, इंजीनियरिंग और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्रों के निर्यात में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

क्या इस समझौते से भारतीय किसानों या डेयरी उद्योग को कोई नुकसान होगा?

नहीं, वाणिज्य मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया है कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को ‘प्रोटेक्टेड लिस्ट’ में रखा गया है। इन क्षेत्रों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है, ताकि स्थानीय किसानों की आजीविका सुरक्षित रहे।

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