अक्टूबर में भारी गिरावट दर्ज
नई दिल्ली: अमेरिका(USA) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(Donald Trump) द्वारा लगाए गए टैरिफ का सीधा असर भारत के इंजीनियरिंग निर्यात पर दिखने लगा है। अक्टूबर 2025 में निर्यात 16.71 प्रतिशत गिरकर 9.37 अरब डॉलर पर आ गया। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (EEPC) के अनुसार, यह गिरावट मुख्यतः अमेरिका को होने वाले निर्यात में भारी कमी के कारण दर्ज की गई है, जिसने पिछले साल की तुलना में आर्थिक परिदृश्य को कमजोर किया है।
ईईपीसी का कहना है कि अमेरिका में भारतीय इंजीनियरिंग वस्तुओं की मांग अक्टूबर 2025 में 14.5 प्रतिशत कम होकर 1.39 अरब डॉलर रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 1.63 अरब डॉलर थी। अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, परंतु टैरिफ बढ़ने से व्यापारिक रुख बदल रहा है और निर्यात को संरचनात्मक नुकसान पहुंच रहा है।
दूसरे देशों में भी गिरावट
इसी बीच कई अन्य देशों में भी भारत का निर्यात तीव्रता से घटा है। आसियान देशों को निर्यात लगभग 50 प्रतिशत गिरकर 1.02 अरब डॉलर रह गया। संयुक्त अरब अमीरात(UAE) को भेजा गया निर्यात 19.3 प्रतिशत घटकर 667 मिलियन डॉलर पर आ गया। उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय संघ(EU) जैसे बड़े बाजारों में लगातार दूसरे महीने साल-दर-साल गिरावट दिखी। इसके अतिरिक्त WANA, दक्षिण एशिया, लैटिन अमेरिका और CIS क्षेत्रों में भी नकारात्मक व्यापार प्रवृत्ति दर्ज की गई।
इसके परिणामस्वरूप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा और व्यापारिक दबाव तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसने कुल निर्यात को कमजोर कर दिया है। यह स्थिति आने वाले महीनों में भी चुनौतीपूर्ण बनी रह सकती है।
निर्यात क्यों घट रहा है
ईईपीसी के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि गिरावट की एक वजह पिछले साल का उच्च आधार प्रभाव है, हालांकि अमेरिकी जवाबी टैरिफ ने इसे और गंभीर बना दिया। उद्योग जगत का मानना है कि व्यापारिक रुख बदलने की मजबूरी ने कुल मांग को काफी नुकसान पहुंचाया है। यह अक्टूबर की गिरावट वित्तीय वर्ष 2025-26 का दूसरा गिरता महीना है, जिससे लगातार चार महीने की वृद्धि समाप्त हो गई।
कई प्रमुख श्रेणियों में भी भारी नुकसान दर्ज हुआ है। एयरक्राफ्ट, स्पेसक्राफ्ट, शिप्स, बोट्स एंड फ्लोटिंग स्ट्रक्चर्स श्रेणियों में 80 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल मशीनरी, आयरन एंड स्टील, इंडस्ट्रियल मशीनरी और एल्युमिनियम उत्पादों में भी नकारात्मक वृद्धि रही।
अन्य पढ़े: Breaking News: Meesho: ई-कॉमर्स की दिग्गज मीशो का IPO
अमेरिका को कुल निर्यात पर असर
GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, मई से अक्टूबर 2025 के बीच अमेरिका को निर्यात 28.5 प्रतिशत घट गया। अप्रैल में 10 प्रतिशत शुल्क अगस्त तक बढ़कर 50 प्रतिशत हो जाने से व्यावसायिक लागत भारी रूप से बढ़ी। इस बढ़ोतरी ने भारत के निर्यातकों पर दबाव को और तीखा कर दिया और बाजार हिस्सेदारी कम हो गई।
अक्टूबर में किस श्रेणी में सबसे अधिक नुकसान हुआ?
अधिकतम नुकसान एयरक्राफ्ट, स्पेसक्राफ्ट और शिपिंग कैटेगरी में दर्ज हुआ, जहां व्यापार 80 प्रतिशत से अधिक गिर गया। साथ ही इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इंडस्ट्रियल मशीनरी जैसी मुख्य श्रेणियों में भी निर्यात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ।
क्या आने वाले महीनों में सुधार की उम्मीद है?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर नीतियों और टैरिफ राहत मिलने पर निर्यात में धीरे-धीरे सुधार आ सकता है। फिलहाल उद्योग को वैश्विक मांग, अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था और व्यापारिक दिशा में स्थिरता का इंतजार है।
अन्य पढ़ें: