शेयर बाजार में कोहराम, रुपया और कच्चे तेल ने तोड़े रिकॉर्ड
मुंबई: 9 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में सुनामी जैसी गिरावट देखी गई, जहां सेंसेक्स 1900 अंक(War) टूटकर 77,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर आ गया। युद्ध की आहट ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है, जिसके चलते केवल 10 दिनों के भीतर निवेशकों की करीब 25 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई। बाजार में चौतरफा बिकवाली का आलम यह है कि बैंकिंग से लेकर ऑटो और FMCG तक, सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।
कच्चे तेल की ‘दोहरी मार’: भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर संकट
कच्चे तेल की ‘दोहरी मार’: भारत की अर्थव्यवस्था(Economy) और आम आदमी की जेब पर संकटकच्चे तेल की कीमतों में आई 60% की भारी उछाल ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती(War) खड़ी कर दी है। ब्रेंट क्रूड के 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने से न केवल भारत का आयात बिल बढ़ेगा, बल्कि घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 5 से 6 रुपये की बढ़ोतरी की आशंका है। इसके सीधे परिणाम स्वरूप माल ढुलाई महंगी होगी और आम आदमी को कमरतोड़ महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
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रुपया ऑलटाइम लो पर: सुरक्षित निवेश के लिए सोने-चांदी की ओर भागे निवेशक
रुपया ऑलटाइम लो पर: सुरक्षित निवेश के लिए सोने-चांदी की ओर भागे निवेशकवैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय रुपया अपने सबसे निचले स्तर 92.28 पर जा गिरा है। निवेशक(War) जोखिम भरे शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश जैसे सोने और चांदी की ओर रुख कर रहे हैं, यही वजह है कि सोने की कीमतें 1.60 लाख रुपये के पार पहुंच गई हैं। जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, बाजार में अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रहने की संभावना है।
शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
मुख्य वजह ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने का डर है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई में इजाफे की आशंका है, जिसके कारण निवेशक घबराकर बिकवाली कर रहे हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का आम जनता पर क्या सीधा असर पड़ेगा?
कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत में पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ जाएंगी, यानी आम जनता की जेब पर महंगाई की मार पड़ेगी।
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