नई दिल्ली: RBI ने रुपए की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए मार्च में जो सख्त पाबंदियां लगाई थीं, उन्हें अब हटा लिया गया है। अब अधिकृत विदेशी मुद्रा डीलर (Authorized Dealers) फिर से ऑफशोर नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में पोजीशन ले सकेंगे। साथ ही, बैंकों को अब ग्राहकों को रुपए से संबंधित फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को ‘रीबुक’ करने की भी अनुमति मिल गई है।
पाबंदी हटाने का कारण और उद्देश्य
मार्च में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ने से रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया था, जिसे स्थिर करने के लिए RBI ने कड़े कदम उठाए थे। अब स्थिति में सुधार और गवर्नर संजय मल्होत्रा के आश्वासन के बाद इन अस्थायी उपायों को वापस ले लिया गया है। यह निर्णय भारतीय मुद्रा के इंटरनेशनलाइजेशन (अंतरराष्ट्रीयकरण) और वित्तीय बाजारों को और अधिक मजबूत बनाने की RBI की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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शर्तों के साथ मिली ढील
हालाँकि पाबंदियां हटा दी गई हैं, लेकिन RBI ने बाजार में अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ सीमाएं तय की हैं:
बैंकों को संबंधित पक्षों (Related Parties) के साथ रुपए में फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट करने की अनुमति नहीं होगी।
बैंकों को हर दिन के अंत में ऑनशोर मार्केट में अपनी नेट ओपन पोजीशन $100 मिलियन (10 करोड़ डॉलर) तक ही सीमित रखनी होगी।
NDF मार्केट क्या होता है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) एक विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है, जिसका उपयोग उन मुद्राओं के लिए किया जाता है जिनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूर्णतः व्यापार नहीं होता है। इसमें भौतिक मुद्रा का आदान-प्रदान न होकर अंत में केवल नकद (Cash) का निपटान होता है। यह बाजार मुद्रा के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
मार्च में RBI ने रुपया ट्रेड पर पाबंदियां क्यों लगाई थीं?
मार्च के अंत में भू-राजनीतिक तनाव (अमेरिका-ईरान युद्ध) के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गई थीं, जिससे रुपया तेजी से गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर (95.21) पर आ गया था। बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी (Speculation) और अस्थिरता को रोकने के लिए RBI ने ये पाबंदियां लगाई थीं।
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