UN: UN दूत की रिपोर्ट और भारत पर आरोप: मुख्य बिंदु

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रिपोर्ट का आधार और ‘टॉर्चर एंड जेनोसाइड’

वाशिंगटन: UN मानवाधिकार परिषद में पेश की गई इस रिपोर्ट में इजराइल द्वारा गाजा और विभिन्न डिटेंशन सेंटर्स में फिलिस्तीनियों के खिलाफ ‘व्यवस्थित यातना’ (Systematic Torture) का उपयोग करने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में गाजा को एक ‘बड़ा यातना शिविर’ (Large Torture Camp) बताते हुए कहा गया है कि वहां जेलों के अंदर और बाहर दोनों जगह निगरानी, ड्रोन और चेकपॉइंट्स के माध्यम से फिलिस्तीनियों के जीवन पर कड़ा नियंत्रण रखा जा रहा है

भारत की भूमिका पर UN दूत की टिप्पणी

फ्रांसेस्का अल्बनीज ने द हिंदू के साथ बातचीत में भारत पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उनका मुख्य तर्क यह है कि:
कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी: उनका मानना है कि इजराइल के साथ करीबी रक्षा और रणनीतिक संबंधों के कारण भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है।
हथियारों का लेन-देन: दूत का कहना है कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) के निर्देशों के बावजूद इजराइल को हथियार भेजना नियमों के खिलाफ हो सकता है।
रणनीतिक साझेदारी का जिक्र: उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा और ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का हवाला देते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया है।

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मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय दबाव

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि इजराइल में पत्रकारों, डॉक्टरों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को लक्षित किया जा रहा है, जो इसे एक ‘राज्य नीति’ (State Policy) का हिस्सा बनाती है। अल्बनीज ने यह भी उल्लेख किया है कि कोलंबिया, साउथ अफ्रीका, स्पेन, स्लोवेनिया और मलेशिया जैसे कई देश इजराइल पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रभावशाली समूहों के कारण वैश्विक स्तर पर ठोस कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

फ्रांसेस्का अल्बनीज ने भारत के संदर्भ में ‘अंतरराष्ट्रीय कानून’ का उल्लेख किस आधार पर किया है?

दूत का मानना है कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने इजराइल के कब्जे को गलत ठहराया है और देशों से हथियारों का लेन-देन रोकने का आह्वान किया है। उनका आरोप है कि भारत की इजराइल के साथ ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ और रक्षा सहयोग इस निर्देश के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दायित्वों का उल्लंघन माना जा सकता है।

रिपोर्ट में ‘जेल से बाहर भी टॉर्चर सिस्टम’ से क्या तात्पर्य है?

रिपोर्ट के अनुसार, यातना केवल जेलों तक सीमित नहीं है। इसमें फेस रिकग्निशन, निगरानी, ड्रोन और चेकपॉइंट्स के माध्यम से फिलिस्तीनियों की रोजमर्रा की जिंदगी पर नियंत्रण का उल्लेख किया गया है। साथ ही, बुनियादी जरूरतों से वंचित रखना और भूख का दबाव बनाना भी इसी ‘सिस्टम’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों की उम्मीद को खत्म करना है।

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