हीमेन और मशहूर फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र (Dharmendra) का सोमवार को निधन हो गया। उनका टोंक शहर से भी नाता रहा है। बात 1981 की है जब टोंक की बनास नदी के फ्रेजर पुल के पास बनास नदी के रेत के टीलों के मध्य धर्मेंद्र और हेमामालिनी पर ‘रजिया सुल्तान’ फिल्म का एक गीत ‘ऐ दिल-ए-नादान, आरजू क्या है,जुस्तजू क्या है’ फिल्माया गया था। यह गीत लिखा था जां निसार अख्तर ने। आवाज थी स्वर कोकिला लता मंगेशकर की। इसके अलावा फिल्म के 15- 20 मिनट के कुछ दृश्य रसिया के टेकरी, अन्नपूर्णा डूंगरी के आसपास पहाड़ी क्षेत्र के फिल्माए थे।
एक झलक पाने के लिए उमड़ते थे लोग
उस समय धर्मेंद्र-हेमा (Dharmendra-Hema) मालिनी का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े थे। रजिया सुल्तान 1983 में बनी एक भारतीय ऐतिहासिक जीवनी पर आधारित फिल्म है, जिसका लेखन और निर्देशन कमाल अमरोही ने किया था। इसमें हेमामालिनी, परवीन बॉबी और धर्मेंद्र मुख्य भूमिकाओं में थे।
मीना कुमारी ने खाए थे खरबूजे और तरबूज
दरअसल प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक कमाल अमरोही और मीना कुमारी एक वक्त टोंक शहर से गुजर रहे थे। जब वो बनास नदी के फ्रेजर पुल से गुजरे तो मीना कुमारी ने कुछ देर यहां रुकने की जिद कर ली। कमाल अमरोही और मीना कुमारी बनास नदी के किनारे पर उतर गए।

टोंक बनास नदी के रेतीले धोरों में गाने की शूटिंग में हेमा मालिनी
जहां बर्फ सी ठंडी रेत पर बैठकर उन्होंने मीठे खरबूजे और तरबूज खाये। बेहद ठंडी और ताजा हवा की लहरों के कारण वहां का वातावरण अच्छा महसूस हो रहा था। चूंकि चांदनी रात थी। इसलिए नदी के पानी में चांद और सितारों की परछाईं के कारण वह स्थान बहुत सुंदर लग रहा था। मीना कुमारी को यह जगह इतनी पसंद आई कि उन्होंने कमाल अमरोही को कह दिया कि यह किसी फिल्म की शूटिंग के लिए अच्छी जगह हो सकती है। आप किसी फिल्म की शूटिंग यहां क्यों नहीं कर लेते।
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1981 में हुई थी शूटिंग
मीना कुमारी की मौत के बाद भी कमाल अमरोही मीना कुमारी की उस इच्छा को नहीं भूले और उन्होंने 1981 में रजिया सुल्तान फिल्म की टोंक में उसी जगह शूटिंग की। रेत के टीलों के बीच यहां एक गीत भी धर्मेंद्र और हेमामालिनी को लेकर फिल्माया गया ‘ऐ दिल-ए-नादान, आरजू क्या है, जुस्तजू क्या है’। पुरानी टोंक के महबूब अली बताते हैं कि रजिया सुल्तान की फिल्म की शूटिंग देखने के लिए पैदल ही नदी में चले जाते थे। धर्मेंद्र के हाथ पर तलवार से वार करने का सीन रसिया की टेकरी के पास ही फिल्माया गया था, यहां इस दिन हजारों लोगों की भीड़ आसपास जमा हो गई थी। तीन- चार बार में यहां की शूटिंग हुई थी।
हालांकि रजिया सुल्तान की कब्र को लेकर एक मान्यता टोंक में यह भी है कि रजिया को टोंक में ही दफनाया गया था। टोंक में रसिया की टेकरी उन्हीं की याद में बनी है। जो है तो रजिया की टेकरी लेकिन अपभ्रंश में उसे रसिया की टेकरी बोला जाने लगा, लेकिन इस बात को लेकर टोंक वासी एक मत नहीं है।
धर्मेंद्र ने कितनी फिल्मों में काम किया है?
धर्मेंद्र हिंदी फिल्मों में अपने काम के लिए जाने जाते थे। बॉलीवुड के “ही-मैन” के रूप में जाने जाने वाले धर्मेंद्र ने पांच दशकों के करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। 1997 में, उन्हें हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला।
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