Kajari Teej : जानें कब और कैसे रखा जाता है यह व्रत

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Kajari Teej
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व्रत की तिथि और समय

Kajari Teej : कजरी तीज (Kajari Teej) का व्रत भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष (krshn paksh) की तृतीया तिथि को रखा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उत्तर भारत की महिलाओं द्वारा किया जाता है

उगते चंद्रमा तक निर्जला व्रत

महिलाएं सुबह सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

व्रत की विधि: कैसे करें पूजन

  • मिट्टी से देवी की प्रतिमा बनाकर स्थापित करें
  • नीम की डाली या पत्ता पूजन में शामिल करें
  • गेहूं, जौ और चने का उपयोग करें
  • दीपक जलाएं और व्रत कथा सुनें या पढ़ें

Kajari Teej Vrat Vidhi In Hindi: कल यानी 12 अगस्त 2025 को कजरी तीज व्रत रखा जाएगा। ये व्रत प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसे तीज को सातुड़ी तीज और भादो तीज भी कहा जाता है। यहां हम आपको बताएंगे कजरी तीज की व्रत विधि।

तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए करती हैं तो वहीं कुंवारी कन्याएं ये व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से करती हैं। ये व्रत मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है।

बाकी तीज की तरह ही इस तीज पर भी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है। इसके अलावा इस तीज पर नीमड़ी माता की पूजा का भी विधान बताया गया है। बता दें इस साल कजरी तीज 12 अगस्त को मनाई जाएगी। यहां हम आपको बताएंगे कजरी तीज का व्रत कैसे रखते हैं? इसके नियम और विधि क्या है।

कजरी तीज के दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रहती हैं। रात में चंद्रमा की पूजा करने के बाद ही ये व्रत खोला जाता है।

गर्भवती महिलाएं ये व्रत कैसे रहें?

गर्भवती महिलाओं को कजरी तीज का व्रत निर्जला नहीं रखना चाहिए। आपको फल, जूस और व्रत में खाई जाने वाली अन्य चीजों का सेवन करते रहना चाहिए जिससे आपको स्वास्थ्य समस्याएं न आएं।

कजरी तीज की पूजा कैसे करें

मुख्य पूजा शाम के समय की जाती है। इसलिए शाम की पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सोलह श्रृंगार करके पूजा में बैठें। विधि विधान पूजा करने के साथ ही कजरी तीज की कथा सुननी चाहिए और भगवान से अपने पति की समृद्धि और लंबी आयु के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। 

कजरी तीज पर झूला झूलने की है परंपरा

तीज के दिन कई महिलाएं झूला झूलती हैं। इस दौरान कजरी तीज के गीत गाती हैं और मिल-जुलकर ये पर्व मनाती हैं।

इस दिन होती है देवी नीमड़ी की पूजा

नीमड़ी पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है जिसमें महिलाएं नीम की डाली को देवी का स्वरूप मानकर उसकी विधि विधान पूजा करती हैं। मान्यताओं अनुसार नीम में देवी दुर्गा का वास होता है ऐसे में इस दिन नीम का पूजन करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।

तीज का मुख्य प्रसाद

तीज के दिन जौ, गेहूं, चावल और चने को घी के साथ मिलाकर विशेष सत्तू तैयार किया जाता है जिसे चंद्रोदय के बाद व्रत खोलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है व्रत

व्रत रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है। चंद्रमा को देखने के बाद व्रत समाप्त हो जाता है, जिसके बाद पारंपरिक रूप से तैयार व्यंजन जिसमें सत्तू से बना भोजन भी शामिल होता है और इसका सेवन करके अपना व्रत खोला जाता है।

कजली तीज की कहानी क्या है ?

इस कथा के अनुसार, एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण दंपति रहते थे। वो दंपति मुश्किल से दो वक्त का भोजन भी जुटा पाते थे। इसलिए, उस साल ब्राह्मण की पत्नी ने कजली तीज का व्रत रखने का संकल्प लिया और जब उसने व्रत रखा, तो अपने पति से कहा – “सुनो जी! आज मेरा तीज माता का व्रत है।

कजरी तीज क्यों मनाया जाता है?

कजरी तीज के दिन दान करने से साधक पर भगवान शिव और जगत की देवी मां अन्नपूर्णा की कृपा बरसती है। धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के दिन कजरी तीज मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।

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Surekha Bhosle

लेखक परिचय

Surekha Bhosle

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