ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव ग्रहों के राजा हैं और सम्मान, सेहत, यश आदि के कारक माने जाते हैं. जिन जातकों की कुंडली में सूर्य बलवान होता है वे लोग जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाते हैं. सूर्य देव से जुड़ी एक बात बहुत प्रचलित है और वो ये कि सूर्य दे सात घोड़ों के रथ पर सवार होते हैं, सूर्य मंदिरों में सूर्यदेव की प्रतिमा भी ऐसी होती है जिसमें सूर्य देव एक ऐसे रख पर सवार होते हैं जिसकी एक पहिया है और रथ को खींचने के लिए सात भिन्न प्रकार के घोड़े हैं. अब सवाल ये उठता है कि सूर्य देव के रथ में केवल एक पहिया क्यों है और सूर्यदेव के रथ में 7 ही घोड़े क्यों है, 6 या 8 क्यों नहीं हैं. आइए इसके बारे में विस्तार से जानें।
सूर्य देव के 7 ही घोड़े क्यों? जानें पौराणिक तथ्य
सूर्य देव के सातों घोड़े एक दूसरे से बिल्कुल अलग
ध्यान दें कि हिंदू धर्म में 7 की संख्या को बहुत महत्व दिया जाता है. एक सप्ताह में भी 7 दिन, इंद्रधनुष के 7 रंग, सूर्य देव के रथ के 7 घोड़े, इन सभी की संख्या 7 है. इसी तरह सूर्य की रोशनी के इन्हीं 7 रंगों के प्रतीक माने जाने वाले ये सातों घोड़े एक दूसरे से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं।
रथ का पहिया भी है देता है विशेष अर्थ
सूर्य देव के रथ के घोड़ों की तरह पहिए की बात करें तो वो भी अपने आप में विशेष हैं. इनके रथ के पहिए को 1 साल के रूप में दर्शाया जाता है और पहिए की 12 तिल्लियां साल के 12 महीनों को चिह्नित करती हैं. भारत के कोणार्क मंदिर को देखें तो इस सूर्य मंदिर में सूर्यदेव की प्रतिमा उनके रथ के साथ है जो अति सुंदर है. उस प्रतिमा को देखकर बहुत कुछ बता चल जाता है।