हैदराबाद । तेलंगाना के प्रसिद्ध बासर मंदिर (Temple ) के विकास से संबंधित मास्टर प्लान को अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित योजना पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण सुझाव (Suggestions) दिए।
मंदिर का विकास भव्य और उत्कृष्ट ढंग से किया जाए
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मंदिर का विकास भव्य और उत्कृष्ट ढंग से किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि विकास कार्य करते समय भक्तों की आस्था का पूर्ण सम्मान किया जाए तथा सभी कार्य शास्त्रों के अनुसार ही किए जाएं। उन्होंने भविष्य की आवश्यकताओं और बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए चौड़ी और सुव्यवस्थित सड़कों का निर्माण करने के निर्देश दिए। साथ ही मंदिर परिसर में केवल इलेक्ट्रिक (ईवी) वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा। मुख्यमंत्री ने मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए नियमों को और सख्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि तिरुमला की तर्ज पर मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
लगभग 225 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्यों की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस महीने की 6 तारीख को बासर मंदिर विकास कार्यों का शिलान्यास किया जाएगा। लगभग 225 करोड़ रुपये की लागत से इन विकास कार्यों की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी कार्य योजनाबद्ध, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं, ताकि बासर मंदिर को एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
बासर सरस्वती मंदिर का इतिहास क्या है?
बासर सरस्वती मंदिर तेलंगाना राज्य के आदिलाबाद जिले के बसारा गांव में स्थित है। यह मंदिर देवी सरस्वती को समर्पित है, जो ज्ञान, शिक्षा, संगीत और कला की देवी मानी जाती हैं।
माना जाता है कि यह मंदिर प्राचीन काल से अस्तित्व में है और यहां की स्थापत्य कला और धार्मिक परंपराएं सदियों पुरानी हैं। मंदिर में देवी सरस्वती की मूर्ति मुख्य गर्भगृह में स्थित है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।
बसारा मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
शादी और विद्या से जुड़ी मान्यता: यह मंदिर खासतौर पर उन लोगों के लिए प्रसिद्ध है जो शिक्षा, संगीत और कला में सफलता चाहते हैं। यहाँ विशेषकर छात्रों और विद्यार्थियों का भारी आस्था आती है। सिंदूर का उत्सव (Vasant Panchami): बसारा मंदिर वसंत पंचमी पर विशेष रूप से भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है। श्री बसारा देवी सरस्वती की अनोखी प्रतिमा: इस मंदिर में देवी की मूर्ति को अद्वितीय और आकर्षक शैली में स्थापित किया गया है, जिससे यह अन्य सरस्वती मंदिरों से अलग पहचान रखता है। धार्मिक पर्यटन: यह मंदिर तेलंगाना और आस-पास के राज्यों से आने वाले भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।
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