खतरनाक खेल : क्या Yunus ने बांग्लादेश को चीन-पाक की कठपुतली बना दिया?
बांग्लादेश, जो एक समय पर आर्थिक विकास और सामाजिक सुधारों का उदाहरण माना जाता था, आज विवादों के घेरे में है।इसका कारण हैं नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद Yunus, जिन पर आरोप है कि उन्होंने देश की विदेश नीति और आंतरिक निर्णयों को चीन और पाकिस्तान के दबाव में ला खड़ा किया है।

Yunus की भूमिका पर सवाल
- यूनुस, जिन्हें माइक्रोफाइनेंस और ग्रामीण बैंक के संस्थापक के रूप में जाना जाता है,
- अब एक राजनीतिक व्यक्ति के रूप में देखे जा रहे हैं।
- कुछ विश्लेषकों का मानना है कि उनके अंतर्राष्ट्रीय संबंध, विशेषकर चीन और पाकिस्तान के साथ, बांग्लादेश की स्वतंत्र विदेश नीति को कमजोर कर रहे हैं।
चीन का बढ़ता प्रभाव
- Yunus के कार्यकाल में चीन को कई रणनीतिक परियोजनाओं का ठेका मिला।
- इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
- बांग्लादेश पर चीनी कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे देश की आर्थिक स्वतंत्रता पर संकट मंडराने लगा है।
पाकिस्तान के साथ संबंधों की नई परिभाषा
- Yunus के कार्यों और कुछ “बैठकों” ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान के साथ पुराने कटु संबंधों को फिर से जीवित किया जा रहा है।
- यह बांग्लादेश की युद्ध स्वतंत्रता की भावना और उसकी मूल पहचान के विपरीत है।

विशेषज्ञों की राय
- राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं:
- “यूनुस का प्रभाव सीमित नहीं है, वह अब एक वैश्विक नेटवर्क के हिस्से के रूप में कार्य कर रहे हैं, जहां बांग्लादेश को एक मोहरा बनाया जा रहा है।”
- कुछ लोग यह भी मानते हैं कि Yunus अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के जरिए देश की नीतियों में हस्तक्षेप करवा रहे हैं।
जनता में नाराज़गी
- सोशल मीडिया पर #BoycottYunus ट्रेंड कर चुका है।
- लोग कह रहे हैं कि अब समय आ गया है कि बांग्लादेश की जनता इस हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज उठाए।
आपकी राय में क्या यूनुस ने देशहित में काम किया है या विदेशी हितों के लिए? नीचे कमेंट करें।