नई दिल्ली। नगरीय निकाय चुनाव को लेकर इस बार चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। कई सालों बाद चुनाव में पुरानी व्यवस्था की वापसी हो रही है। इस बार मतदान ईवीएम (Voting EVM) से नहीं, बल्कि बैलेट पेपर से कराए जाएंगे। इस बदलाव से न सिर्फ मतदान प्रक्रिया बदलेगी, बल्कि चुनाव परिणाम आने में भी समय लगेगा।
नतीजों के लिए 72 घंटे तक इंतजार
मीडिया रिपोर्ट (Media Report) के मुताबिक ईवीएम से होने वाले चुनावों में जहां मतगणना कुछ ही घंटों में पूरी हो जाती थी, वहीं बैलेट पेपर से मतदान होने पर करीब 72 घंटे तक का समय लग सकता है। इससे उम्मीदवारों और समर्थकों की बेचैनी भी बढ़ेगी।
18 साल बाद बैलेट पेपर की वापसी
इससे पहले वर्ष 2008 में नगर निकाय चुनाव बैलेट पेपर (Ballet Paper) से कराए गए थे। उस समय मतगणना पूरी होने में करीब तीन दिन का समय लगा था। 2008 के बाद चुनाव प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के लिए नगर निकाय चुनावों में ईवीएम को शामिल किया गया था। इसके बाद हुए दो चुनाव ईवीएम से कराए गए, लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने करीब 18 साल पुरानी बैलेट पेपर प्रणाली को दोबारा लागू करने का फैसला किया है।
एक बॉक्स में दो बैलेट पेपर
रिपोर्ट के मुताबिक बैलेट पेपर प्रणाली के तहत मतदाताओं को इस बार एक ही बैलेट बॉक्स में दो अलग-अलग बैलेट पेपर डालने होंगे। एक बैलेट पेपर महापौर पद के लिए होगा, जबकि दूसरा पार्षद पद के लिए। ऐसे में मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को अधिक सतर्क रहना होगा।
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प्रशासनिक चुनौतियां और बढ़ेगा इंतजार
चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ेंगी। वहीं परिणाम आने में देरी के कारण उम्मीदवारों की धड़कनें भी तेज होंगी। कुल मिलाकर इस बार नगर निकाय चुनाव न सिर्फ मतदान का, बल्कि धैर्य और इंतजार की भी परीक्षा साबित होगा।
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