आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025 को ध्वनिमत से पारित

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राज्यसभा ने बुधवार को विपक्ष के संशोधनों को खारिज करते हुए आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक का उद्देश्य भारत में प्रवेश, निवास और यात्रा से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाना तथा विदेशियों और आव्रजन से संबंधित सभी मामलों को विनियमित करना है। इसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई है।

विपक्ष ने किया सदन से बहिर्गमन

लोकसभा पहले ही इस विधेयक को पारित कर चुकी है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए। विधेयक पर चार घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए राय ने कहा कि चूंकि पुराना कानून कमजोर और बिखरा हुआ था, इसलिए संबंधित कानूनों को शामिल करके नया कानून बनाना जरूरी हो गया था। मंत्री ने कहा कि यह विधेयक देश की आंतरिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा तथा इसे वर्ष 2047 तक देश के विकास के लिए मजबूत आधारशिला रखने के लिए लाया गया है।

देश की सुरक्षा के लिए लाया गया है यह विधेयक

देश में भय का माहौल पैदा करने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश में भय का माहौल पैदा करने के लिए नहीं बल्कि देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त विदेशियों को बाहर निकालने तथा देश में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि देश में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक तीन वर्षों के गहन विचार-विमर्श के बाद देश की जरूरतों के अनुरूप लाया गया है और इसमें देश में प्रवेश करने वालों के लिए वैध दस्तावेज अनिवार्य कर दिए गए हैं।

राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को देश में रहने की इजाजत नहीं

उन्होंने कहा कि अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए देश में आने वाले लोगों का स्वागत है, लेकिन राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को देश में रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसीलिए देश में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी और निगरानी अनिवार्य कर दी गई है। इससे पहले दिन में कांग्रेस ने मोदी सरकार पर भय पैदा करने और व्यक्तियों के बीच भेदभाव करने का आरोप लगाया।

यह विधेयक पूरे देश में भय पैदा करेगाःमनु सिंघवी

चर्चा की शुरुआत करते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह विधेयक पूरे देश में भय पैदा करेगा और संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करेगा। यह अधिकारियों को अत्यधिक शक्तियां प्रदान करता है, भेदभाव को बढ़ावा देता है, तथा सरकार को मनमाने ढंग से विदेशियों को निर्वासित करने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक आव्रजन अधिकारियों को अनियंत्रित अधिकार प्रदान करता है तथा उनके निर्णयों के विरुद्ध अपील का कोई प्रावधान नहीं करता। उन्होंने दावा किया कि इन अधिकारियों के पास किसी को भी विदेश यात्रा करने से रोकने का अधिकार होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह विधेयक भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए खतरा है – हालांकि यह फिलहाल विदेशियों को निशाना बनाता है, लेकिन जल्द ही यह भारतीय नागरिकों को भी प्रभावित कर सकता है।

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