51वां राज्य बनाने की तैयारी और वैश्विक तनाव
वाशिंगटन: अमेरिकी(America) सांसद रैंडी फाइन द्वारा पेश किया गया ‘ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट’ एक ऐतिहासिक कदम है। इस बिल का प्राथमिक उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रपति को वे सभी कानूनी अधिकार देना है जिससे वे ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र में मिला सकें। यदि यह बिल हाउस और सीनेट में पास हो जाता है, तो यह ग्रीनलैंड को अलास्का(Alaska) की तरह अमेरिका का 51वां पूर्ण राज्य बनाने का रास्ता साफ कर देगा। हालांकि, यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और डेनमार्क की संप्रभुता के सीधे उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रम्प की रणनीति: रूस-चीन का डर और राष्ट्रीय सुरक्षा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस बिल का खुलकर समर्थन किया है। उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, जो अमेरिका के लिए खतरा है। ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि ग्रीनलैंड केवल एक द्वीप नहीं, बल्कि अमेरिका(America) की रक्षा के लिए एक ‘किले’ जैसा है। उन्होंने यहाँ तक संकेत दिया है कि अगर कूटनीतिक तरीकों से बात नहीं बनी, तो अमेरिका ‘सख्त कदम’ (Hard Way) भी उठा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रम्प ने इसके लिए सैन्य योजना बनाने के भी निर्देश दिए हैं।
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डेनमार्क और ग्रीनलैंड का कड़ा विरोध
ग्रीनलैंड पिछले 300 सालों से डेनमार्क का हिस्सा है और वर्तमान में एक स्वायत्त क्षेत्र है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने इसे नाटो गठबंधन(America) के अंत की चेतावनी दी है। वहीं ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश ‘बिकाऊ नहीं है’। यूरोपीय संघ और नाटो के अन्य सदस्य देशों ने भी ट्रम्प के इस रुख की आलोचना की है, क्योंकि यह सीधे तौर पर एक सहयोगी देश की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देता है।
अमेरिका ग्रीनलैंड को अपना हिस्सा बनाने के लिए इतना उतावला क्यों है?
इसके दो मुख्य कारण हैं: रणनीतिक, आर्थिक और भौगोलिक रूप से ग्रीनलैंड आर्कटिक शिपिंग रूट्स और उत्तरी अटलांटिक की निगरानी के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ कब्जा होने से अमेरिका(America) रूस और चीन को अपने पास आने से रोक सकता है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण पिघलती बर्फ के नीचे तेल, गैस और दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार मिलने की संभावना है, जो भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हैं।
क्या अमेरिका कानूनी रूप से किसी दूसरे देश के क्षेत्र पर कब्जा कर सकता है?
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी संप्रभु राष्ट्र के हिस्से पर बिना उसकी मर्जी के कब्जा करना अवैध है। हालांकि, अमेरिका का तर्क ऐतिहासिक मिसालों (जैसे अलास्का की खरीद या लुइसियाना खरीद) पर आधारित है। यदि यह बिल पास होता है, तो यह अमेरिका के भीतर तो राष्ट्रपति को अधिकार देगा, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसे ‘अतिक्रमण’ माना जाएगा, जिससे अमेरिका पर प्रतिबंध या राजनयिक अलगाव का खतरा बढ़ सकता है।
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