ईरान युद्ध के बाद अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों में तनाव
लंदन: ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण अमेरिका और ब्रिटेन(Britain) के बीच कूटनीतिक तनाव गहरा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ब्रिटेन को एक तरह से ‘सजा’ देने के विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें फॉकलैंड द्वीप पर ब्रिटेन के दावे की अमेरिकी नीति की समीक्षा करना भी शामिल है। यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल दो पुराने सहयोगियों के बीच दरार को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक रक्षा गठबंधन (NATO) के भीतर भी भविष्य की रणनीति पर सवाल खड़े कर रहा है।
अर्जेंटीना का ‘माल्विनास’ मिशन और ट्रम्प से नजदीकी
अर्जेंटीना(Argentina) के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच बढ़ती नजदीकियों ने इस मुद्दे को नई हवा दी है। अर्जेंटीना लंबे समय से फॉकलैंड द्वीप को ‘माल्विनास’ के रूप में अपना क्षेत्र बताता आया है और अब उसे अमेरिका से इस मुद्दे पर समर्थन मिलने की उम्मीद है। अर्जेंटीना की सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इन द्वीपों की वापसी के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। यह स्थिति ब्रिटेन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि 1982 के युद्ध के बाद से ही फॉकलैंड की संप्रभुता ब्रिटेन की विदेशी नीति का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
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कूटनीतिक जटिलताएं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिकी पेंटागन के अंदरूनी ईमेल के सार्वजनिक होने के बाद से स्पेन और ब्रिटेन दोनों ने कड़ा रुख अपनाया है। स्पेन ने स्पष्ट किया है कि वे केवल आधिकारिक नीतियों को मानते हैं, न कि लीक ईमेल को। दूसरी ओर, NATO अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि संगठन के नियमों के तहत किसी सदस्य देश को गठबंधन से बाहर करना या उनकी भूमिका सीमित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। भले ही अमेरिका आधिकारिक तौर पर फॉकलैंड पर किसी पक्ष का समर्थन नहीं करता, लेकिन इतिहास गवाह है कि 1982 के युद्ध में अमेरिका ने ब्रिटेन का साथ दिया था। अब देखना यह है कि यह कूटनीतिक दबाव का खेल भविष्य में क्या नया मोड़ लेता है।
फॉकलैंड द्वीप विवाद का मुख्य कारण क्या है?
फॉकलैंड द्वीप (जिसे अर्जेंटीना ‘माल्विनास’ कहता है) की संप्रभुता को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच दशकों पुराना विवाद है। अर्जेंटीना इसे अपनी भौगोलिक निकटता के आधार पर अपना मानता है, जबकि ब्रिटेन वहां के निवासियों की इच्छा और ऐतिहासिक नियंत्रण को आधार मानकर अपना अधिकार जताता है।
अमेरिका द्वारा फॉकलैंड नीति की समीक्षा करने की चर्चा क्यों हो रही है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में ब्रिटेन द्वारा शुरुआत में एयरबेस देने से इनकार करने से नाराज है। इसी नाराजगी के चलते अमेरिका ब्रिटेन पर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए फॉकलैंड को लेकर अपनी तटस्थ नीति की समीक्षा करने पर विचार कर सकता है।
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