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American Flag जलना वैध राजनितिक अभिव्यक्ति , ट्रम्प का रुख कुछ और

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American Flag जलना वैध राजनितिक अभिव्यक्ति , ट्रम्प का रुख कुछ और

वाशिंगटन, 26 अगस्त 2025: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अमेरिकी झंडा जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान करते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इस आदेश के तहत, अमेरिकी ध्वज (American Flag) जलाने वालों को एक साल तक की जेल की सजा हो सकती है, जिसमें जल्दी रिहाई या जमानत का कोई विकल्प नहीं होगा

साथ ही, यदि कोई विदेशी नागरिक इस कृत्य में शामिल पाया जाता है, तो उसका वीजा, निवास परमिट, या नागरिकता प्रक्रिया रद्द की जा सकती है और उसे देश से निष्कासित किया जा सकता है। हालांकि, इस आदेश की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पहले झंडा जलाने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत संरक्षित माना है।

ट्रंप का कार्यकारी आदेश: कड़ा रुख और विवाद

राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में इस आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि अमेरिकी झंडा जलाना एक “बेहद आक्रामक और उत्तेजक” कृत्य है, जो देश के मूल्यों और स्वतंत्रता का अपमान करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कृत्य दंगे और हिंसा को भड़का सकते हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ट्रंप ने विशेष रूप से लॉस एंजिल्स में हाल के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया, जहां आप्रवासन नीतियों (ICE) के खिलाफ प्रदर्शनकारियों द्वारा अमेरिकी झंडा जलाए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की तुलना “जानवरों” से की और कहा कि ऐसे लोग कड़ी सजा के लिए तैयार रहें।

आदेश में न्याय विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह झंडा जलाने के मामलों में आपराधिक और नागरिक कानूनों को सख्ती से लागू करे। ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया कि वह सीनेटरों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर और सख्त कानून बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता vs ट्रंप का आदेश

ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश के सामने एक बड़ी कानूनी चुनौती है, क्योंकि 1989 में टेक्सास बनाम जॉनसन मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 5-4 के बहुमत से फैसला दिया था कि झंडा जलाना संविधान के पहले संशोधन के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। कोर्ट ने इसे एक वैध राजनीतिक अभिव्यक्ति माना था। इस फैसले का हवाला देते हुए, ट्रंप के आदेश को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रंप ने अपने आदेश में 1989 के इस फैसले को स्वीकार तो किया, लेकिन यह भी कहा कि कुछ मामलों में मुकदमा चलाने की गुंजाइश बनी रहती है। उनके प्रशासन का तर्क है कि झंडा जलाने से हिंसा और दंगे भड़क सकते हैं, जिसे रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं।

विरोध और प्रतिक्रियाएं

ट्रंप का यह आदेश अमेरिका में एक बड़े विवाद को जन्म दे सकता है। डेमोक्रेटिक नेताओं और नागरिक अधिकार समूहों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य फैसले को “अधिनायकवाद की ओर भयावह कदम” करार देते हुए ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाए थे

लॉस एंजिल्स में आप्रवासन नीतियों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान झंडा जलाने की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद ट्रंप ने नेशनल गार्ड और मरीन्स की तैनाती का फैसला किया। इस कदम की कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने आलोचना की और इसे राज्य की संप्रभुता का उल्लंघन बताया।

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