वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिका की संघीय अपीलीय अदालत ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति को दुनिया के देशों पर मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि ट्रंप द्वारा भारत समेत लगभग सभी देशों पर आयात शुल्क थोपना संवैधानिक सीमाओं से बाहर है।
“संरक्षणवादी दीवार” पर अदालत की टिप्पणी
अमेरिकी फेडरल सर्किट (Americi Fedral Service) अपीलीय अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ट्रंप ने राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला देकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था के चारों ओर संरक्षणवादी दीवार खड़ी करने की कोशिश की। हालांकि अदालत ने मौजूदा शुल्कों को फिलहाल बरकरार रखा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था में अचानक अस्थिरता न पैदा हो।
“संसद का ऐसा इरादा कभी नहीं था”
न्यायाधीशों ने अपने लिखित फैसले में कहा, “ऐसा प्रतीत नहीं होता कि राष्ट्रपति को शुल्क लगाने का असीमित अधिकार देने का संसद का कोई इरादा है।” अदालत ने साफ कर दिया कि यह अधिकार केवल कांग्रेस की मंजूरी से ही लागू किया जा सकता है।
ट्रंप ने दी चुनौती, जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने हालांकि तत्काल शुल्क रद्द नहीं किए और ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपील की अनुमति दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा, “अगर इसे ऐसे ही रहने दिया गया, तो यह फैसला सचमुच अमेरिका को बर्बाद कर देगा।”व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने भी ट्रंप का बचाव करते हुए कहा कि, “पूर्व राष्ट्रपति ने पूरी तरह कानूनी तरीके से काम किया है और हमें इस मामले में अंतिम जीत की उम्मीद है।”
डोनाल्ड ट्रम्प कौन हैं?
डोनाल्ड जॉन ट्रम्प (जन्म 14 जून, 1946) एक अमेरिकी राजनीतिज्ञ, मीडिया व्यक्तित्व और व्यवसायी हैं जो संयुक्त राज्य अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति हैं। रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य, उन्होंने 2017 से 2021 तक 45वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। डोनाल्ड जूनियर.
डोनाल्ड ट्रम्प किस धर्म के हैं?
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने जीवन का अधिकांश समय प्रेस्बिटेरियन ईसाई धर्म अपनाया था, लेकिन अक्टूबर 2020 में उन्होंने खुद को गैर-सांप्रदायिक ईसाई घोषित कर दिया, हालाँकि उनके व्यक्तिगत संबंध कभी-कभी करिश्माई ईसाइयत से जुड़े हुए हैं। उनके शुरुआती जीवन में माँ के माध्यम से प्रेस्बिटेरियन धर्म का प्रभाव था, और इस धर्म का उन्होंने सार्वजनिक तौर पर पालन किया, जिसमें 2016 का राष्ट्रपति अभियान भी शामिल था।
Read More :