ग्रीनलैंड विवाद ने फ्रेडरिक्सन की लोकप्रियता में लगाया उछाल
कोपनहेगन: डेनमार्क की प्रधानमंत्री(Denmark PM) मेटे फ्रेडरिक्सन, जो कुछ समय पहले तक अपनी गिरती लोकप्रियता और स्थानीय चुनावों में हार के कारण राजनीतिक संकट से जूझ रही थीं, अब एक मजबूत नेता के रूप में उभरी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जे(Possession) की धमकी और डेनिश पीएम द्वारा उसके करारे जवाब ने पूरे देश को उनके पीछे एकजुट कर दिया है। ताजा सर्वे के अनुसार, फ्रेडरिक्सन की सोशल डेमोक्रेट पार्टी को अब संसद में 41 सीटें मिलती दिख रही हैं, जो पिछले महीने के मुकाबले 9 सीटों की बड़ी बढ़त है।
संकट को अवसर में बदला: संप्रभुता की रक्षा
विवाद की शुरुआत तब हुई जब ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को डेनमार्क से अलग कर अमेरिका में मिलाने की बात कही। फ्रेडरिक्सन ने बिना डरे देश की संप्रभुता(Sovereignty) का बचाव किया और यूरोपीय देशों को एकजुट किया, जिसके चलते ट्रम्प को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। इस कूटनीतिक जीत ने फ्रेडरिक्सन(Denmark PM) की छवि बदल दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह कोविड महामारी के दौरान देश एकजुट हुआ था, वैसी ही एकजुटता अब ट्रम्प के बयानों के विरोध में फ्रेडरिक्सन के समर्थन में दिख रही है। इससे पार्टी को कोपेनहेगन जैसे उन इलाकों में भी खोई जमीन वापस पाने में मदद मिली है, जहाँ वे 100 साल में पहली बार हारे थे।
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वैश्विक रुझान: ट्रम्प विरोध बना जीत का मंत्र
यह रुझान केवल डेनमार्क तक सीमित नहीं है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी उन नेताओं को चुनावी फायदा मिल रहा है जिन्होंने ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीतियों के सामने सख्ती दिखाई है। कनाडा में जहाँ लिबरल पार्टी हार की कगार पर थी, ट्रम्प की धमकी(Denmark PM) के बाद उसने खुद को ‘कनाडा के आत्मसम्मान’ का रक्षक बताकर जीत हासिल की। डेनमार्क में भी अब माना जा रहा है कि फ्रेडरिक्सन नवंबर 2026 की समय सीमा से पहले ही जल्दी चुनाव कराकर इस बढ़ती लोकप्रियता का फायदा उठा सकती हैं और दोबारा सत्ता में आ सकती हैं।
ग्रीनलैंड विवाद ने पीएम फ्रेडरिक्सन की गिरती लोकप्रियता को कैसे बचाया?
ग्रीनलैंड को डेनमार्क(Denmark PM) का हिस्सा बनाए रखने के लिए फ्रेडरिक्सन ने ट्रम्प के सामने कड़ा रुख अपनाया। जब किसी देश की संप्रभुता पर खतरा आता है, तो जनता अक्सर सत्ताधारी सरकार के साथ खड़ी हो जाती है। इसी ‘राष्ट्रीय संकट’ के भाव ने उनकी लोकप्रियता को 32 सीटों से बढ़ाकर 41 सीटों तक पहुँचा दिया।
2020 में ‘मिंक’ विवाद के कारण पीएम की आलोचना क्यों हुई थी?
कोरोना काल में वैज्ञानिकों के दावों पर पीएम ने 1.7 करोड़ मिंक जानवरों को मारने का आदेश दिया था ताकि संक्रमण न फैले। बाद में अदालत ने इसे गलत बताया और इससे किसानों का करोड़ों का व्यापार तबाह हो गया, जिससे उनकी रेटिंग 79% से गिरकर 34% रह गई थी।
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