सिडनी। International Energy Agency (IEA) ने वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। आईईए के प्रमुख Fatih Birol ने सोमवार को कहा कि युद्ध से पैदा हुआ ऊर्जा संकट पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन गया है और कोई भी देश इससे अछूता नहीं रहेगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा
ऑस्ट्रेलिया की राजधानी (Canberra) में नेशनल प्रेस क्लब में बोलते हुए बिरोल ने कहा कि मौजूदा हालात पहले के दो बड़े तेल संकटों का मिला-जुला रूप बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया एक बड़े आर्थिक खतरे का सामना कर रही है और इस स्थिति से निपटने के लिए तत्काल वैश्विक प्रयास जरूरी हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना संकट की जड़
बताया जा रहा है कि (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है। इससे वैश्विक पेट्रोलियम बाजार पर गहरा असर पड़ा है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। डीजल, जेट ईंधन और एलपीजी जैसे रिफाइंड उत्पादों की कीमतों में भी भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिससे आम लोगों से लेकर उद्योगों तक सभी प्रभावित हो रहे हैं।
युद्ध ने बढ़ाई आपूर्ति बाधा
Iran और United States-Israel के बीच जारी युद्ध को लगभग तीन सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन इसके खत्म होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इस संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी आपूर्ति बाधाओं में से एक को जन्म दिया है। अनुमान है कि हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल और तेल उत्पादों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
ट्रंप की चेतावनी, ईरान का पलटवार
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने Iran को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा। ट्रंप के बयान के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी पलटवार करते हुए कहा कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो वह न केवल होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से बंद कर देगा, बल्कि क्षेत्र के अन्य ऊर्जा केंद्रों को भी निशाना बनाएगा।
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आपातकालीन भंडार खोलने पर सहमति
आईईए ने पहले भी इस संकट को लेकर चेतावनी दी थी। हाल ही में एजेंसी के सदस्य देशों ने आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है। यह एजेंसी के इतिहास में सबसे बड़ी स्टॉक रिलीज मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो यह संकट और गहरा सकता है और वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
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