India US Trade Deal : भारत द्वारा दिए गए व्यापार प्रस्ताव को यदि अमेरिका पूरी तरह स्वीकार करता है, तो वॉशिंगटन को तुरंत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने चाहिए—ऐसा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन का सकारात्मक रवैया स्वागतयोग्य है, लेकिन लंबे समय से प्रतीक्षित इस समझौते के लिए कोई समयसीमा बताना सही नहीं होगा।
उनकी यह प्रतिक्रिया अमेरिकी ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव जेमिसन ग्रीयर के उस बयान पर आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को भारत से अब तक का “सबसे अच्छा प्रस्ताव” मिला है। इस पर गोयल ने कहा कि “अगर वे वास्तव में इतने खुश हैं, तो उन्हें तुरंत साइन करना चाहिए।” हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि भारत ने अमेरिका को क्या प्रस्ताव दिया है।
दोनों देशों के बीच अब तक पांच दौर की बातचीत हो चुकी है। वहीं अमेरिका के डिप्टी ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव रिक स्विट्ज़र की भारत यात्रा किसी नई बातचीत का हिस्सा नहीं है, बल्कि द्विपक्षीय समझ बढ़ाने के लिए है। स्विट्ज़र और भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल की टीम के बीच दिल्ली में दो दिन की वार्ता समाप्त हुई, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक सहयोग, रक्षा, ऊर्जा और उभरती तकनीकों पर चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई टेलीफोन बातचीत में भी व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि समझौता मार्च तक साइन हो जाएगा, गोयल ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी सौदे में दोनों पक्षों को लाभ होना चाहिए और डेडलाइन दबाव में निर्णय गलत हो सकते हैं।
अमेरिका की ओर से आए संकेत भी महत्वपूर्ण हैं। (India US Trade Deal) अमेरिका का कहना है कि भारत में कुछ कृषि उत्पादों और मांस श्रेणियों पर प्रतिबंध या सीमाएं होने के कारण चर्चा कठिन रही है। लेकिन अमेरिका के अनुसार भारत की मौजूदा पेशकशें अब तक की सबसे मजबूत हैं, जिससे नया बाजार विकल्प खुल सकता है।
ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 50% तक भारी टैरिफ लगाए हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों पर बड़ा दबाव बना है। रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक कमजोर होने से व्यापार वार्ता का महत्व और बढ़ गया है। अमेरिकी बाजार भारत के कुल निर्यात का लगभग 18% हिस्सा रखता है, इसलिए उद्योग जगत समझौते को लेकर उत्सुक है।
पहले 25% शुल्क भारत के साथ व्यापार घाटे के कारण लगाया गया था, और बाद में रूस से क्रूड खरीदने पर अतिरिक्त 25% पेनल्टी जोड़ दी गई। भारत स्पष्ट कर चुका है कि इन टैरिफों का समाधान होना ही व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की कुंजी है। अमेरिका बादाम, सेब, मक्का और कुछ औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क में राहत चाहता है, लेकिन भारत किसान और MSME हितों पर समझौता नहीं करना चाहता।
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