JD VANCE: जेडी वेंस का बड़ा बयान

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H-1B वीजा में कटौती को बताया ‘सच्ची ईसाई राजनीति’, भारतीयों की बढ़ेगी मुश्किल

वाशिंगटन: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस(JD VANCE) ने H-1B वीजा प्रोग्राम पर अपनी सरकार की सख्त नीतियों का बचाव करते हुए इसे ‘सच्ची ईसाई राजनीति’ (True Christian Politics) करार दिया है। टर्निंग पॉइंट USA के कन्वेंशन में वेंस ने कहा कि ईसाई मूल्यों का अर्थ केवल सामाजिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अमेरिकी कामगारों के आर्थिक सम्मान की रक्षा करना भी शामिल है। उनके अनुसार, विदेशी कर्मचारियों की तुलना में अपने देश के नागरिकों को नौकरी देना एक नैतिक जिम्मेदारी है, और यही वह दर्शन है जिस पर ट्रंप प्रशासन काम कर रहा है

कंपनियों पर सख्ती: सस्ते विदेशी विकल्प चुनने वालों को चेतावनी

जेडी वेंस(JD VANCE) ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन उन कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है जो अमेरिकी मजदूरों को नजरअंदाज कर ‘तीसरी दुनिया’ से सस्ता श्रम (Cheap Labor) मंगाती हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों द्वारा नौकरियों को आउटसोर्स करना या स्किल्ड वीजा के जरिए विदेशी वर्कफोर्स को प्राथमिकता देना गलत है। वेंस के मुताबिक, ट्रंप सरकार ने कांग्रेस की मदद के बिना ही H-1B वीजा को सीमित करने के कदम उठाए हैं, ताकि अमेरिकी युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें और मानवीय श्रम की गरिमा बनी रहे।

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भारतीयों पर गहरा असर: आईटी सेक्टर और स्किल्ड वर्कफोर्स के लिए झटका

H-1B वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियर होते हैं। जेडी वेंस का यह सख्त रुख सीधे तौर पर उन हजारों भारतीयों को प्रभावित करेगा जो अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे हैं या वहां पहले से कार्यरत हैं। वेंस ने समावेशी पहलों (Inclusion Initiatives) को ‘इतिहास का कूड़ादान’ बताते हुए साफ कर दिया है कि आने वाले समय में इमिग्रेशन और वर्क वीजा के नियम और भी कड़े हो सकते हैं, जिससे भारतीय टेक कंपनियों और कुशल कामगारों के लिए अमेरिका के दरवाजे संकीर्ण हो जाएंगे।

जेडी वेंस ने H-1B वीजा कटौती को ‘ईसाई मूल्यों’ से क्यों जोड़ा है?

जेडी वेंस का मानना है कि एक सरकार का कर्तव्य अपने नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा करना है। उन्होंने तर्क दिया कि ‘ईसाई राजनीति’ के तहत परिवार और बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ नागरिकों को सम्मानजनक रोजगार देना भी शामिल है। उनके अनुसार, विदेशी कामगारों को बुलाकर अपने लोगों को बेरोजगार छोड़ना अनैतिक है, इसलिए वे वीजा पाबंदियों को एक नैतिक और धार्मिक दृष्टिकोण दे रहे हैं।

इस नीति का भारतीय आईटी क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

चूंकि भारतीय कंपनियां और प्रोफेशनल्स H-1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, इसलिए वीजा सीमित होने से भारतीय आईटी सेक्टर की लागत (Cost) बढ़ जाएगी। कंपनियों को अब स्थानीय अमेरिकी नागरिकों को उच्च वेतन पर नियुक्त करना पड़ सकता है या अपने ऑपरेशंस को अन्य देशों में शिफ्ट करना होगा। इसके अलावा, अमेरिका जाने के इच्छुक भारतीय युवाओं के लिए कानूनी अड़चनें और बढ़ जाएंगी।

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Dhanarekha

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