मालदीव,। मालदीव और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीपसमूह से जुड़े समुद्री क्षेत्र को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। मालदीव का दावा है कि उसने उत्तरी चागोस (North chagos) समुद्री क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक संस्थानों ने इसे मॉरीशस का हिस्सा माना है।
मालदीव ने शुरू किया विशेष निगरानी अभियान
मालदीव रक्षा मंत्रालय ने बताया कि मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (MNDF) ने 4 फरवरी से एक विशेष निगरानी अभियान शुरू किया है। इस ऑपरेशन में कोस्ट गार्ड जहाज ‘धरमवंथा’ और एयर कॉर्प्स के ड्रोन तैनात किए गए हैं। यह अभियान दक्षिणी बेसलाइन से 200 नॉटिकल मील तक फैले समुद्री क्षेत्र में चल रहा है।
राष्ट्रीय कानून और संविधान का हवाला
मालदीव सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कदम देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए है। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Mohammad Muijju) के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 115(डी) के तहत राष्ट्रपति देश की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, अनुच्छेद 243, सशस्त्र बल अधिनियम और मालदीव समुद्री क्षेत्र अधिनियम का भी हवाला दिया गया, जो समुद्री क्षेत्रों की निरंतर निगरानी का कानूनी आधार प्रदान करते हैं।
पूर्व पत्र वापस लेने का फैसला
राष्ट्रपति मुइज्जू ने यह भी घोषणा की कि उनकी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह द्वारा मॉरीशस के प्रधानमंत्री को भेजा गया पत्र वापस ले लिया है, जिसमें चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता पर रुख स्पष्ट किया गया था। यह फैसला कैबिनेट और कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श के बाद लिया गया।
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हिंद महासागर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछली सरकार का कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों के लिए जोखिम पैदा कर सकता था। इस घटनाक्रम ने हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।
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