Mossad का घातक हमला: यमन में हुती नेतृत्व का खात्मा

Read Time:  1 min
मोसाद
मोसाद
FONT SIZE
GET APP

इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। यमन की राजधानी सना में एक सटीक और गोपनीय ऑपरेशन में मोसाद ने ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों की पूरी शीर्ष नेतृत्व को ध्वस्त कर दिया।

यह हमला इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के उस सपने को पूरा करता है, जिसमें उन्होंने हमास, हिजबुल्ला और हुती विद्रोहियों—जिन्हें ‘ट्रिपल H’ कहा जाता है—को इजरायल के लिए खतरा मानते हुए खत्म करने की कसम खाई थी। इस ऑपरेशन ने हुती विद्रोहियों की कमर तोड़ दी, जो लाल सागर में इजरायली जहाजों और इजरायल पर मिसाइल हमलों के लिए जिम्मेदार थे

सना में मोसाद का मास्टरस्ट्रोक

मोसाद ने लंबे समय से इस ऑपरेशन की योजना बनाई थी। यमन में अपने गुप्तचरों और तकनीकी निगरानी के जरिए मोसाद ने जानकारी जुटाई कि हुती सरकार के शीर्ष नेता, जिसमें प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी, रक्षा मंत्री मुहम्मद नासिर अल-अथाफी और चीफ ऑफ स्टाफ मुहम्मद अब्द अल-कारीम अल-घमारी शामिल थे, एक सरकारी भवन में इकट्ठा होने वाले हैं। जैसे ही उनके फोन और गैजेट्स के एक जगह सक्रिय होने का सिग्नल मिला, मोसाद ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। इजरायली वायुसेना के एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स ने सना में उस इमारत को निशाना बनाया, जिसे मिनटों में मलबे में बदल दिया गया। साथ ही, अचूक निशाने वाले हेरोन ड्रोन्स ने एक अन्य ठिकाने को तबाह किया। इस हमले में हुती सरकार के 12 से अधिक मंत्रियों और सैन्य कमांडरों की मौत की खबर है।

अहमद अल-रहावी और अल-अथाफी का अंत

हुती सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी, जो 10 महीने पहले इस पद पर नियुक्त हुए थे, इस हमले में मारे गए। रहावी हुती विद्रोहियों का कूटनीतिक चेहरा थे, जिन्होंने ईरान, हिजबुल्ला और हमास के साथ मिलकर एक संगठित नेटवर्क स्थापित किया था। उनकी मृत्यु हुती विद्रोहियों के लिए बड़ा झटका है। वहीं, रक्षा मंत्री मुहम्मद नासिर अल-अथाफी, जो 2016 से इस पद पर थे, हुती विद्रोहियों के सैन्य रणनीतिकार थे। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स और हिजबुल्ला के साथ मिलकर उन्होंने कई इजरायल-विरोधी अभियान चलाए थे। उनकी मृत्यु ने हुती विद्रोहियों की सैन्य शक्ति को गहरी चोट पहुंचाई है।

इजरायल की रणनीति और भविष्य

यह ऑपरेशन इजरायल की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें उसने ईरान समर्थित संगठनों को कमजोर करने का लक्ष्य रखा है। नेतन्याहू ने कहा, “जो इजरायल को नुकसान पहुंचाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।” मोसाद का यह हमला न केवल हुती विद्रोहियों, बल्कि ईरान और उसके सहयोगियों के लिए भी एक चेतावनी है। हालांकि, हुती नेताओं ने दावा किया कि उनके हमले रुकेंगे नहीं, लेकिन इस ऑपरेशन ने उनकी संगठनात्मक क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया है।

digital

लेखक परिचय

digital

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।