तेहरान,। खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध और तनाव के बीच (United States) और Iran के बीच एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) दावा कर रहे हैं कि ईरान समझौते के लिए लगभग तैयार है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
ईरान ने अमेरिका पर लगाया दबाव बनाने का आरोप
ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कालिबाफ का कहना है कि अमेरिका आर्थिक दबाव, नौसैनिक घेराबंदी और मीडिया प्रोपेगेंडा के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने एक्स पर एक विवादास्पद पोस्ट में लिखा कि अमेरिका का “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” खत्म हो चुका है और अब ईरान की एकता को कमजोर करने की साजिशें रची जा रही हैं। ईरान का स्पष्ट मानना है कि वह किसी भी दबाव में आकर आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
48 घंटे में डील होने के दावे से बढ़ी हलचल
यह कूटनीतिक विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने दावा किया कि दोनों देश एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब हैं और अगले 24 से 48 घंटों के भीतर युद्ध खत्म करने वाली डील हो सकती है। खबरों के अनुसार, Pakistan इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान की ओर से संकेत मिले हैं कि दोनों पक्ष 14 बिंदुओं वाले समझौता ज्ञापन पर सहमति बनाने के करीब हैं।
परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर हो सकती है सहमति
चर्चा है कि इस समझौते के तहत ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को रोकने पर सहमत हो सकता है। इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगे कुछ कड़े प्रतिबंध हटाने और उसकी अरबों डॉलर की जब्त संपत्तियों को मुक्त करने पर विचार कर सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे अहम मुद्दा
सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू करना है, जिसे ईरान ने फरवरी के अंत से रोक रखा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति की इच्छा जताते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान शर्तों को नहीं मानता, तो सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है।
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दुनिया की नजरें अगले 48 घंटों पर
फिलहाल, ट्रंप ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नाम के उस नौसैनिक मिशन को रोक दिया है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए चलाया जा रहा था। इस समय दुनिया की नजरें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं। यदि बातचीत सफल होती है, तो न केवल वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होगी, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में मंडरा रहे महायुद्ध के बादल भी छंट सकते हैं। फिलहाल, होर्मुज में फंसे जहाज और वैश्विक बाजार किसी ठोस नतीजे का इंतजार कर रहे हैं।
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