ऊपरी सदन के चुनाव के लिए दिग्गजों ने मिलाया हाथ
काठमांडू: नेपाल(Nepal) के तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों-शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’-की पार्टियों के बीच गठबंधन की बातचीत अंतिम चरण में है। यह गठबंधन 25 जनवरी को होने वाले ‘राष्ट्रीय सभा’ (ऊपरी सदन) के चुनाव के लिए किया जा रहा है। गठबंधन का मुख्य उद्देश्य सीटों का बंटवारा इस तरह करना है कि संविधान निर्माण में शामिल प्रमुख राजनीतिक शक्तियां एकजुट रहें। ‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, सीटों के संभावित फॉर्मूले के तहत नेपाली कांग्रेस को 7 और UML को 6 सीटें मिल सकती हैं।
सीटों का गणित और रिटायर होते सदस्यों का समीकरण
नेपाल की राष्ट्रीय सभा एक स्थायी सदन है जिसमें 59 सदस्य होते हैं। इस बार 4 मार्च को 18 निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें सबसे अधिक 8 सदस्य केपी शर्मा ओली की पार्टी (UML) से हैं। दिलचस्प बात यह है कि नेपाली(Nepal) कांग्रेस का कोई भी सदस्य इस समय रिटायर नहीं हो रहा है, फिर भी वह गठबंधन(Alliance)के तहत 7 सीटों पर दावा कर रही है। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, उम्मीदवारों को 7 जनवरी तक नामांकन दाखिल करना है, जिसके लिए बैठकों का दौर जारी है।
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2026 के आम चुनाव पर नजर: भविष्य की रणनीति
ऊपरी सदन का यह गठबंधन केवल तात्कालिक नहीं है, बल्कि इसे 5 मार्च 2026 को होने वाले प्रतिनिधि सभा (निचला सदन) के आम चुनावों के पूर्वाभ्यास के रूप में देखा जा रहा है। नेपाली(Nepal) कांग्रेस के नेताओं ने संकेत दिए हैं कि संविधान की रक्षा के लिए प्रमुख दल भविष्य के संसदीय चुनावों में भी साथ मिलकर लड़ सकते हैं। चूंकि प्रतिनिधि सभा पहले ही भंग की जा चुकी है, इसलिए राष्ट्रीय सभा के चुनाव देश की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नेपाल की ‘राष्ट्रीय सभा’ क्या है और इसमें चुनाव की प्रक्रिया क्या होती है?
राष्ट्रीय सभा नेपाल(Nepal) की संसद का ऊपरी और स्थायी सदन है, जिसमें कुल 59 सदस्य होते हैं। इनमें से 56 सदस्य सात प्रांतों से (प्रत्येक से 8) चुने जाते हैं और 3 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है, लेकिन सदन की निरंतरता बनाए रखने के लिए हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं, जिनके स्थान पर नए सदस्य चुने जाते हैं।
इस गठबंधन का नेपाल की भविष्य की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
यदि नेपाली कांग्रेस और CPN-UML जैसी धुर विरोधी पार्टियां गठबंधन करती हैं, तो इससे नेपाल में राजनीतिक स्थिरता आने की उम्मीद है। हालांकि, यह गठबंधन छोटे दलों और मधेस आधारित पार्टियों के लिए चुनौती पेश कर सकता है। साथ ही, यह 2026 के आम चुनावों में एक बड़े ‘सुपर-गठबंधन’ की नींव रख सकता है, जिससे चुनावी मुकाबला काफी हद तक एकतरफा हो सकता है।
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