तेल अवीव। मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि इजराइल ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की योजना बना सकता है। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile) कार्यक्रम और परमाणु गतिविधियों को लेकर इजराइल की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
ईरान के मिसाइल कार्यक्रम से भड़का इजराइल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास को लेकर इजराइल खासा सतर्क है। इसी वजह से इजराइली नेतृत्व ईरान के खिलाफ फिर से स्ट्राइक करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
29 दिसंबर को ट्रंप से मिलेंगे नेतन्याहू
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 29 दिसंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से मुलाकात करने वाले हैं। इस दौरान वे ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई और आगे की रणनीति पर अमेरिका को पूरी जानकारी दे सकते हैं।
अमेरिका से मदद को लेकर होगी बातचीत
सूत्रों के अनुसार नेतन्याहू ट्रंप (Netanyahu Trump) से यह भी जानना चाहेंगे कि ईरान के खिलाफ किसी भी अभियान में अमेरिका किस तरह की सैन्य या रणनीतिक मदद दे सकता है। रिपोर्ट्स में ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इस मुद्दे पर इजराइल पहले भी अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत कर चुका है।
परमाणु ठिकानों को लेकर इजराइल की चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अपने क्षतिग्रस्त परमाणु ठिकानों का पुनर्निर्माण कर लिया है, जिससे इजराइल की चिंताएं और बढ़ गई हैं। इसके साथ ही ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण कार्यक्रम को लेकर भी इजराइल आशंकित है।
आईएईए को नहीं मिल रही संवेदनशील ठिकानों तक पहुंच
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि संगठन ईरान के सबसे संवेदनशील परमाणु ठिकानों तक अब तक पहुंच नहीं बना सका है।
आईएईए पर भरोसा नहीं कर रहा ईरान
ईरान ने स्पष्ट किया है कि अपने परमाणु संयंत्रों और वैज्ञानिकों की सुरक्षा को लेकर वह आईएईए पर भरोसा नहीं कर सकता। रूसी समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका-ईरान संबंध सामान्य होने के बाद निरीक्षक कुछ ठिकानों तक पहुंचे थे, लेकिन जिन ठिकानों पर अमेरिकी हमले में नुकसान हुआ था, वहां अब भी निरीक्षण नहीं हो पाया है।
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जून 2025 में बढ़ा था इजराइल-ईरान तनाव
गौरतलब है कि जून 2025 में इजराइल और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था और दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हवाई हमले किए थे। इजराइल ने ईरान पर गुप्त परमाणु कार्यक्रम चलाने का आरोप लगाया था, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया।
अमेरिकी हमलों के बाद आईएईए से दूरी
इजराइल के हमलों के नौ दिन बाद अमेरिका ने 22 जून को नतांज, इस्फहान और फोर्डो में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इसके बाद ईरान ने संसद के जरिए आईएईए के साथ सहयोग समाप्त करने का फैसला लिया था।
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