पाकिस्तान को सब सिखाने उठाए गए कई और सख्त कदम
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद आतंकवादियों के पनाहगाह पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने कई सख्त और अहम कदम उठा दिए हैं। पहले सिंधु नदी का पानी कराया। उसके बाद एयर स्पेस बंद किया। भारत में पाकिस्तानी सोशल मीडिया को बंद कराया। और अब, कर्जखोर पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) से लोन मिलना भी बंद हो जाएगा। इसका कारण यह है कि पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए आर्थिक मोर्चेबंदी के तहत भारत ने आईएमएफ से उसे लोन की समीक्षा करने की अपील की है।
पाकिस्तान के खिलाफ भारत के दो बड़े कदम
मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, आतंकवाद के पनाहगाह Pak को नेस्तनाबूद करने के लिए भारत फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में Pak को शामिल कराने का प्रयास कर सकता है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि Pak के खिलाफ भारत दो बड़े कदम उठाने पर विचार कर रहा है। इसमें पहला यह कि भारत Pak को FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल कराने की कोशिश करेगा। दूसरा यह कि आईएमएफ की ओर से आर्थिक मदद के तौर पर कर्ज के रूप में मिलने वाले 7 बिलियन डॉलर के सहयोग पैकेज की समीक्षा करने की वैश्विक आर्थिक संस्था से अपील कर सकता है।
अभी और बिगड़ेगी पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति
Pak का FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होने से उसकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों जैसे आईएमएफ, विश्व बैंक और यूरोपीय संघ से कर्ज लेना मुश्किल हो जाएगा। विदेशी निवेश और व्यापार पर असर पड़ेगा, क्योंकि कंपनियां और बैंक पाकिस्तान के साथ लेनदेन में सावधानी बरतेंगी। लेनदेन की लागत बढ़ेगी और देश की मुद्रा पर दबाव आएगा। इसके साथ ही, आतंकवाद वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर सख्ती बढ़ेगी, जिसके लिए पाकिस्तान को ठोस कदम उठाने होंगे, वरना ब्लैक लिस्ट में जाने का खतरा भी बना रहेगा।
आईएमएफ की लोन समीक्षा से क्या होगा?
अगर आईएमएफ पाकिस्तान को 7 बिलियन डॉलर के सहयोग पैकेज पर समीक्षा करता है और इसे रोक देता है, तो पाकिस्तान को गंभीर आर्थिक नुकसान होगा। यह कर्ज बाहरी ऋण चुकाने और आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है। रुकावट से विदेशी मुद्रा भंडार और कमजोर हो सकता है, जो वर्तमान में 9.5 बिलियन डॉलर है। इससे आयात प्रभावित होगा। पाकिस्तानी रुपये पर दबाव बढ़ेगा। महंगाई और ब्याज दरें बढ़ेंगी और विकास दर और गिर सकती है, जो 2024 में 2% थी। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय निवेश और अन्य वित्तीय सहायता भी रुक सकती है, जिससे आर्थिक संकट गहरा सकता है।
एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में कैसे शामिल होगा पाकिस्तान
पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल कराने के लिए भारत को इसके दूसरे सदस्य देशों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए प्लेनरी के जरिए अप्रूवल दिया है। प्लेनरी FATF के लिए सारे फैसले करती है। इस प्लेनरी की साल में तीन पर बैठक होती है। पहली बार फरवरी में, दूसरी बार जून और तीसरी बार अक्टूबर में होती है। ग्रे लिस्ट में शामिल होने के बाद पाकिस्तान में विदेशी निवेश और पूंजी प्रवाह पर गहरा असर पड़ेगा और उसकी अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लग सकता है।
अक्टूबर 2022 में ग्रे लिस्ट से बाहर निकला है पाकिस्तान
ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान पहली बार FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होगा। इससे पहले भी जून 2018 तक पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में शामिल था। भारत सरकार के अधिकारियों को कहना है कि FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होने के बाद पाकिस्तान की ओर से भारत में आने वाले अवैध फंड पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। पहले भी मदद मिली थी। पाकिस्तान FATF का सदस्य देश नहीं है। वह एशिया पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग (APG) का सदस्य है। भारत FATF और APG दोनों का सदस्य है।
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