8 अप्रैल पाकिस्तान सरकार ने अफगान शरणार्थियों को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया को जल्द कर दिया है। इसके असर अब रावलपिंडी जैसे सिटी में दिखाई देने लगे हैं, जहां कई अफगान दुकानों और होटलों को थमा कर दिया गया है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 31 मार्च की समय-सीमा समाप्त होने के बाद पाकिस्तान ने निर्वासन की विधि को और गति दी है। हजारों अफगान नागरिकों को अफगानिस्तान वापस भेजा जा चुका है।
अफगान नागरिकों की दुकानें बंद, होटल व्यवसाय ठप
रावलपिंडी शहर और छावनी इलाक़ा में कई अफगान तिजारत बंद हो चुके हैं। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के अनुसार, दुकानदार अपना सामान बेचकर दुकानें खाली कर रहे हैं। कुछ दुकानदार तो अचानक ओझल हो गए हैं।

यहां तक कि लोकप्रिय अफगान होटल भी अब बंद हो चुके हैं। गुल मोहम्मद, जो रावलपिंडी में छोटा होटल चलाते थे, उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया और बिना कुटुंब के तोरखम बॉर्डर से निर्वासित कर दिया। उन्होंने टोलो न्यूज को बताया, “मुझे खैबर पख्तूनख्वा में हिरासत में रखा गया और फिर जबरन देश से बाहर कर दिया गया।
“डॉन अखबार के अनुसार, मात्र रविवार रात को ही लगभग 4,966 अफगान नागरिकों को अफगानिस्तान भेजा गया। अधिकारियों ने कहा कि सोमवार को भेजे गए पनाहगार की संख्या बाद में जारी की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चिंता, पाकिस्तान ने खारिज की आपत्तियाँ
हालांकि पाकिस्तान गवर्नमेंट की इस नीति की आलोचना हो रही है। यूएनएचसीआर और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने शरणार्थियों के साथ हो रहे बर्ताव पर व्यग्रता जाहिर की है। इन संगठनों ने कहा है कि अफगानिस्तान की वर्तमान हालत शरणार्थियों के लिए सावधान नहीं है। बावजूद इसके, पाक गवर्नमेंट ने इन परेशानी को अस्वीकृत कर दिया है।