India Russia oil trade : रूस ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब तक भारत को सस्ते दामों पर कच्चा तेल देने वाला रूस अब प्रीमियम कीमत वसूलने की तैयारी में है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने से तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसी बीच रूस ने अपनी तेल कीमतों में बदलाव कर दिया है।
डिस्काउंट से प्रीमियम तक क्यों बदली रूस की नीति?
यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद रूस भारत को प्रति बैरल 15 से 30 डॉलर तक की छूट देकर तेल बेच रहा था। लेकिन अब रूस अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट क्रूड कीमत से 2 से 5 डॉलर ज्यादा वसूल रहा है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल है। ऐसे में रूस अब भारत को लगभग 92 से 95 डॉलर प्रति बैरल के बीच तेल बेच सकता है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य का असर भारत की चिंता बढ़ी
भारत की कुल तेल जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा (India Russia oil trade) होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। लेकिन इस मार्ग में बाधा आने के कारण भारतीय रिफाइनरियां अब रूस की ओर ज्यादा रुख कर रही हैं। इससे रूसी तेल की मांग बढ़ गई है और कीमतों में भी इजाफा हो रहा है।
पेट्रोल-डीजल महंगे होने की आशंका
तेल आयात महंगा होने से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। पहले ही एलपीजी गैस की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो परिवहन लागत भी बढ़ेगी, जिससे रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।
लंबा समुद्री रास्ता बढ़ता परिवहन खर्च
मिडिल ईस्ट संकट के कारण अब तेल टैंकरों को अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से होकर ‘केप ऑफ गुड होप’ मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। इससे समुद्री बीमा और परिवहन लागत में भारी वृद्धि हो गई है। रूस के बाल्टिक बंदरगाहों से निकलने वाला तेल अपेक्षाकृत सस्ता होता है, लेकिन भारत तक पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत बढ़ जाती है।
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