वाशिंगटन। एपस्टीन फाइल्स से हो रहे खुलासों ने अमेरिका, जो खुद को ‘मानवाधिकार रक्षक’ कहता है, की धज्जियां उड़ा दी हैं। एक ग्लोबल सर्वे में 92% लोगों ने माना कि एपस्टीन कांड (Epstin Case) ने अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि अमेरिका के अमीर और ताकतवर लोगों के काले कारनामों का प्रतीक है।
जनता का भरोसा हिल गया
सर्वे के अनुसार, 85.1% लोगों को फाइलों की सच्चाई जानकर गहरा धक्का लगा। 97.1% ने कहा कि यह मामला मानवीय अंतरात्मा का अपमान है और अमीरों के नैतिक पतन की पराकाष्ठा है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि इसमें शामिल शक्तिशाली लोगों की अब तक कोई जांच नहीं हुई।
आम जनता के लिए अलग, अमीरों के लिए अलग
95.6% उत्तरदाताओं का मानना है कि अमेरिकी कोर्ट (US Court) शक्तिशाली लोगों के लिए अलग और आम जनता के लिए अलग कानून चलाते हैं। फाइलों को सालों तक कोर्ट में सील बंद रखा गया और जब जारी किया गया, तो आधी से भी कम फाइलें ही बाहर आईं। 93.9% लोगों ने इसे ‘चयनात्मक पारदर्शिता’ और धोखे के रूप में देखा।
पैसे और पावर का खेल, सबसे बड़ी बलि गरीब लड़कियों की
यह मामला पैसे और सत्ता के बीच की शिकारी दोस्ती को उजागर करता है। 92.5% लोगों ने गरीब और वंचित वर्ग की लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई। 86.7% का मानना है कि अमेरिका में न्यायिक संरक्षण की उम्मीद करना अब बेकार है।
राजनीति और समाज में विभाजन बढ़ा
अमेरिका की कमियों को सुधारने की बजाय इसे राजनीतिक अखाड़ा बना दिया गया है। डेमोक्रेटिक (Democratic) और रिपब्लिकन पार्टियां इसे एक-दूसरे पर आरोप लगाने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। 85.3% लोगों को लगता है कि इससे समाज में नफरत और विभाजन बढ़ेगा। 92.7% का मानना है कि असली करप्शन अभी सामने आना बाकी है।
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सर्वे ने दुनिया को भरोसा खोने पर मजबूर किया
सर्वे में 24 घंटे के अंदर 9,690 लोगों ने अपनी राय दी। नतीजों से यह साबित होता है कि अमेरिकी मूल्यों और इंसाफ पर अब दुनिया का मोहभंग हो चुका है। एपस्टीन कांड ने अमेरिका की ‘मानवाधिकार कूटनीति’ की हवा निकाल दी है।
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