Jerusalem । मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और इजराइल (America and Israel) के रुख को लेकर नए संकेत सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) के हालिया फैसलों और बयानों ने युद्ध की दिशा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं इजराइल ने अपना आक्रामक रुख बरकरार रखा है।
ट्रंप के फैसले से बदला समीकरण
शुरुआत में अमेरिका की ओर से कड़े रुख के संकेत दिए गए थे, लेकिन अब Donald Trump ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है। यह फैसला दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत के मद्देनजर लिया गया है।
इजराइल का सख्त रुख कायम
वहीं (Benjamin Netanyahu) ने स्पष्ट किया है कि इजराइल अपने सैन्य अभियान को जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि देश अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है और अंतिम लक्ष्य हासिल होने तक अभियान नहीं रुकेगा।
समझौते की कोशिशें जारी
नेतन्याहू ने यह भी बताया कि अमेरिका और इजराइल मिलकर एक ऐसे समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं, जो दोनों देशों के हितों को सुरक्षित रखते हुए युद्ध के उद्देश्यों को पूरा कर सके।
ईरान और हिजबुल्लाह पर बढ़ा दबाव
इजराइल ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को निशाना बनाने की बात दोहराई है। साथ ही लेबनान में Hezbollah के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी गई है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका-ईरान वार्ता के संकेत
वाशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने को लेकर सकारात्मक बातचीत शुरू हुई है। पांच दिनों के लिए हमले टालने का फैसला इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में बढ़ी हलचल
इस बीच United Nations Security Council में भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। बहरीन ने एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही गई है।
प्रस्ताव पर सस्पेंस कायम
प्रस्ताव में ईरान से वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रोकने की मांग की गई है। हालांकि, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति के कारण इसके पारित होने को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।
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अगले पांच दिन बेहद अहम
युद्ध अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर साफ दिखने लगा है। ऐसे में आने वाले पांच दिन यह तय कर सकते हैं कि क्षेत्र में शांति स्थापित होगी या संघर्ष और बढ़ेगा।
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