अमेरिकी कार्रवाई पर रूस की कड़ी चेतावनी
मॉस्को: अमेरिका(US) द्वारा वेनेजुएला(Venezuela) में की गई सैन्य कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी है। रूसी दार्शनिक अलेक्जेंडर डुगिन ने इसे वैश्विक व्यवस्था के टूटने का संकेत बताया है। उनके अनुसार यह घटना बताती है कि दुनिया अब एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुकी है। इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय कानून और शक्तियों के संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मॉस्को में दिए गए बयान में अलेक्जेंडर डुगिन(Alexander Dugin) ने कहा कि रूस सहित बड़ी ताकतों को अब अपने हितों की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाने होंगे। उन्होंने इसे केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक नियमों के अंत की शुरुआत करार दिया। हालांकि उन्होंने यह भी इशारा किया कि आने वाले समय में बड़े देश अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र तय करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय कानून पर सवाल
डुगिन का मानना है कि वेनेजुएला में अमेरिकी(US) सैन्य अभियान ने यह साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून अब व्यवहार में नहीं रहा। उन्होंने कहा कि शक्तिशाली देश अपनी जीत के आधार पर नए नियम लिखेंगे। यह सोच वैश्विक कूटनीति को अस्थिर दिशा में ले जा सकती है।
उनके अनुसार जब तक कोई देश अपनी ताकत साबित नहीं करता, तब तक उसकी आवाज को महत्व नहीं दिया जाएगा। इस विचारधारा से यह संकेत मिलता है कि भविष्य में संघर्ष और प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। इससे छोटे देशों की सुरक्षा और संप्रभुता पर भी खतरा बढ़ सकता है।
यूक्रेन और शक्ति राजनीति
डुगिन ने यूक्रेन संघर्ष को रूस के लिए वैश्विक शक्तियों के क्लब में प्रवेश का साधन बताया। उनका कहना है कि यदि रूस अपनी स्थिति मजबूत करता है, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा उन्होंने चेतावनी दी कि कमजोर पड़ने पर अन्य ताकतें नियम थोपेंगी।
इस दृष्टिकोण से यूक्रेन युद्ध केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रह जाता, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का प्रतीक बन जाता है। ऐसे बयानों से यह स्पष्ट होता है कि रूस इस संघर्ष को रणनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है।
मादुरो की गिरफ्तारी और प्रतिक्रिया
अमेरिकी(US) राष्ट्रपति द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पकड़ने की घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी। इस दावे के बाद वेनेजुएला ने स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की और संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया।
रूस सहित कई देशों ने इस कार्रवाई पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग उठी है और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि मामला केवल द्विपक्षीय नहीं रहा।
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भविष्य के संकेत
डुगिन की चेतावनी वैश्विक राजनीति में बढ़ते टकराव की ओर इशारा करती है। यदि शक्तिशाली देश खुलेआम सैन्य हस्तक्षेप करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कमजोर होगी।
ऐसी स्थिति में देशों के बीच अविश्वास बढ़ेगा और संघर्ष की आशंका गहराएगी। यह घटनाक्रम आने वाले वर्षों की वैश्विक दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
डुगिन के बयान को इतना अहम क्यों माना जा रहा है
वे रूसी सत्ता के वैचारिक मार्गदर्शक माने जाते हैं। उनके विचार अक्सर नीति निर्माण से जुड़े होते हैं। इसलिए उनके शब्दों को केवल व्यक्तिगत राय नहीं माना जाता। इससे रूस की संभावित रणनीति का संकेत मिलता है।
अमेरिकी कार्रवाई पर वैश्विक चिंता का कारण क्या है
यह संप्रभु देश में सीधा हस्तक्षेप माना जा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय कानून की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। अन्य देशों को भी भविष्य में ऐसे कदमों का डर सताता है।
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