ढाका । बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान (Tariq Rehman) अपने वतन लौट आए हैं। देश में फरवरी में होने वाले आम चुनावों को लेकर उन्होंने तैयारियां शुरू कर दी हैं। समर्थकों के बीच उन्हें संभावित प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विरासत संभालने की तैयारी में तारिक रहमान
तारिक रहमान अपने दिवंगत पिता जियाउर रहमान (Ziaur Rahman) और मां खालिदा जिया (Khaldea Zia) की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय हो गए हैं। ढाका की सड़कों पर उनके स्वागत में उमड़ी भीड़ यह संकेत दे रही है कि बीएनपी उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाने के मूड में है।
छोटे भाई अराफात रहमान कोको की यादें हुईं ताजा
तारिक रहमान की वापसी के साथ ही बांग्लादेश में उनके छोटे भाई अराफात रहमान कोको की यादें भी एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। कोको ने सत्ता और राजनीति से दूरी बनाए रखते हुए अपना जीवन क्रिकेट के विकास को समर्पित कर दिया था।
राजनीति नहीं, क्रिकेट को बनाया जीवन का लक्ष्य
अराफात रहमान कोको उन गिने-चुने लोगों में शामिल थे, जिन्होंने सत्ता के बेहद करीब रहते हुए भी सक्रिय राजनीति में कदम नहीं रखा। उनका मानना था कि खेल के माध्यम से देश को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है, और इसी सोच के साथ उन्होंने क्रिकेट को अपना मिशन बनाया।
बांग्लादेश क्रिकेट के स्वर्ण युग की नींव
साल 2001 में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) की डेवलपमेंट कमेटी के चेयरमैन के रूप में कोको ने क्रिकेट की मजबूत बुनियाद रखी। उनके मार्गदर्शन में मुशफिकुर रहीम, शाकिब अल हसन और तमीम इकबाल जैसी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिला। यही पीढ़ी आगे चलकर बांग्लादेश क्रिकेट के स्वर्ण युग की पहचान बनी।
अंडर-19 वर्ल्ड कप से लेकर स्टेडियम विकास तक
कोको की दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि 2004 में आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप का सफल आयोजन बांग्लादेश में हुआ। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बोगुरा के शहीद चंदू स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया।इसी मैदान पर 2006 में बांग्लादेश ने श्रीलंका को हराकर विश्व क्रिकेट में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम और बीपीएल की परिकल्पना
अराफात रहमान कोको ने मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम को आधुनिक क्रिकेट स्टेडियम में बदलने का प्रस्ताव दिया था और इसके लिए ऑस्ट्रेलिया से मुफ्त आर्किटेक्चरल डिजाइन हासिल किया।
इतना ही नहीं, आज लोकप्रिय बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) का विचार भी उन्होंने ही 2003 में सबसे पहले रखा था।
क्लब क्रिकेट और युवा प्रतिभाओं को मिला मंच
क्रिकेट के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके नेतृत्व में ओल्ड डीओएचएस स्पोर्ट्स क्लब ने अपने पहले ही सत्र में प्रीमियर डिवीजन का खिताब जीत लिया।
उन्होंने खिलाड़ियों के लिए पेशेवर कोच, फिजियो और आधुनिक ट्रेनिंग सुविधाएं उपलब्ध कराईं। विस्फोटक बल्लेबाज तमीम इकबाल की खोज का श्रेय भी उनके क्लब विजन को दिया जाता है।
विवादों और संघर्षों से भरा रहा जीवन
हालांकि, कोको का जीवन केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा। 2007 में राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान उन्हें अपनी मां के साथ गिरफ्तार किया गया। बाद में उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना करना पड़ा।स्वास्थ्य कारणों से पैरोल मिलने के बाद वे इलाज के लिए पहले बैंकॉक और फिर मलेशिया चले गए।
कम उम्र में हुआ दुखद निधन
24 जनवरी 2015 को मात्र 45 वर्ष की आयु में मलेशिया में दिल का दौरा पड़ने से अराफात रहमान कोको का निधन हो गया। उनके असमय जाने से बांग्लादेशी खेल जगत को गहरा आघात पहुंचा।
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राजनीति के नए अध्याय के बीच क्रिकेट को याद कर रहा देश
आज जब तारिक रहमान बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रहे हैं, तब देश अराफात रहमान कोको के निस्वार्थ योगदान को भी याद कर रहा है।
क्रिकेट को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में उनकी भूमिका को बांग्लादेश कभी भुला नहीं सकता, और खेल जगत के लिए उनकी कमी आज भी पूरी नहीं हो सकी है।
तारिक रहमान की बेटी कौन है?
ज़ैमा ज़र्नज़ रहमान (जन्म 26 अक्टूबर 1995), जिन्हें ज़ैमा रहमान के नाम से जाना जाता है, एक बैरिस्टर हैं और बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान की इकलौती बेटी हैं। वह बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया और पूर्व राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान की पोती हैं।
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