Middle East: मिडिल ईस्ट जंग का असर

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पाकिस्तान और बांग्लादेश में गहराया ईंधन संकट, भारत सतर्क

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20% तक की भारी बढ़ोतरी(Middle East) के बाद स्थिति विकट हो गई है। सरकार ने ईंधन(Fuel) बचाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, जिसके तहत सरकारी दफ्तर हफ्ते में केवल चार दिन खुलेंगे और आधे कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। इसके अलावा, मंत्रियों और सलाहकारों के विदेश दौरे रद्द कर दिए गए हैं, सांसदों के वेतन में 25% की कटौती की गई है और स्कूलों को दो हफ्तों के लिए बंद कर दिया गया है। सरकारी वाहनों के ईंधन खर्च में भी 50% की कटौती की गई है

बांग्लादेश में ईंधन की राशनिंग और अफरातफरी

बांग्लादेश में स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने ईंधन की बिक्री पर सख्त राशनिंग लागू की है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और घबराहट(Nervousness) में हो रही खरीदारी को देखते हुए, बाइक के लिए 2 लीटर और निजी कारों के लिए अधिकतम 10 लीटर पेट्रोल की सीमा(Middle East) तय कर दी गई है। उद्योगों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है, जहाँ कई उर्वरक कारखाने अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और तेल जमा न करने की अपील की है।

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भारत में फिलहाल राहत की स्थिति

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, देश के पास पर्याप्त ईंधन भंडार है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार नहीं करतीं, तब तक घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डाला जाएगा।

पाकिस्तान सरकार ने ईंधन बचाने के लिए कौन से मुख्य कदम उठाए हैं?

पाकिस्तान सरकार ने सरकारी दफ्तरों को हफ्ते में चार दिन खोलने, आधे कर्मचारियों(Middle East) के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करने, स्कूलों को दो हफ्ते तक बंद रखने, मंत्रियों और सलाहकारों के विदेश दौरे रोकने और सरकारी वाहनों के ईंधन भत्ते में 50% की कटौती करने जैसे कड़े निर्णय लिए हैं।

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर क्यों हैं?

भारत में ईंधन की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं क्योंकि देश के पास ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल से अधिक नहीं हो जातीं, तब तक घरेलू बाजार में कीमतें नहीं बढ़ाई जाएंगी।

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Dhanarekha

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