DGCA के नए दिशानिर्देश : खराब मौसम में उड़ान अब और भी सुरक्षित

Read Time:  1 min
DGCA
DGCA
FONT SIZE
GET APP

सुरक्षा सर्वोपरि: नई नीतियों पर ज़ोर

DGCA ने पायलटों और एयरलाइनों को निर्देश दिए हैं कि खराब मौसम (mausam) में उड़ान भरने से पहले मौसम की सटीक जानकारी और वैकल्पिक लैंडिंग प्लान सुनिश्चित करें।

विमानन नियामक DGCA ने खराब मौसम में उड़ान के लिए अपने नियमों को अपडेट किया है. नए नियम कहते हैं कि फ्लाइट शेड्यूल से ज्यादा यात्रियों और क्रू की सुरक्षा महत्वपूर्ण है. पायलटों को सलाह दी गई है कि अगर मौसम खराब या खतरनाक हो तो तुरंत फ्लाइट को डायवर्ट करने या वापस लौटाने का फैसला लें. ये नियम केदारनाथ में हाल के हेलिकॉप्टर हादसों और पिछले महीने श्रीनगर जा रही इंडिगो फ्लाइट में तेज टर्बुलेंस की घटना के बाद आए हैं. DGCA ने सभी शेड्यूल्ड और नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स के लिए एक नया सर्कुलर जारी किया है, जिसमें मौसम की समस्याओं से निपटने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

फ्लाइट क्रू को हर समय रहना होगा सतर्क

DGCA ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम पहले से ज्यादा अनिश्चित हो गया है. इसलिए फ्लाइट क्रू को हमेशा सतर्क रहना है. सर्कुलर में साफ कहा गया है कि उड़ान का समय-सारिणी से ज्यादा जरूरी सुरक्षित उड़ान है. पायलटों को खराब मौसम में फ्लाइट को डायवर्ट करने, रास्ता बदलने या वापस लौटाने की आजादी दी गई है. कप्तानों को मौसम के हिसाब से तुरंत फैसला लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

खराब मौसम में उड़ान के लिए सावधानियां

DGCA ने पायलटों और ऑपरेटर्स को सलाह दी है कि वे सावधानी बरतें और मौसम का पहले से ध्यान रखें. पायलटों को तूफानी बादलों से कम से कम 20 नॉटिकल मील दूर रहना है. तूफानी बादलों के नीचे उड़ान भरना खतरनाक है, क्योंकि इससे हवा के तेज झोंके, बिजली गिरने या ओले पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

खराब मौसम में पायलटों को जल्दी से उड़ान का रास्ता बदलने या डायवर्ट करने का फैसला लेना है. तेज हवाओं, विंडशीयर, बर्फ जमने, तूफानी बादलों या अचानक दृश्यता कम होने पर फ्लाइट को डायवर्ट या रीरूट करना होगा. बारिश या गीले रनवे पर रात में उड़ान भरते समय देखने में भ्रम हो सकता है. DGCA ने सलाह दी है कि पायलट अपने देखे हुए को हमेशा इंस्ट्रूमेंट्स से जांचें, ताकि अप्रोच और लैंडिंग सही हो।

पैसेंजर्स को सूचना देना जरूरी

DGCA ने पहली बार अपनी गाइडलाइन्स में आइस क्रिस्टल आइसिंग की समस्या को जोड़ा है. यह तूफानी मौसम में होने वाली खतरनाक स्थिति है. पायलटों को ऐसे इलाकों में ऊपर-नीचे जाने के बजाय बगल से रास्ता लेने को कहा गया है. यह सलाह दुनिया की बेहतरीन प्रथाओं के मुताबिक है. खराब मौसम या टर्बुलेंस में संवाद बहुत जरूरी है।

DGCA ने निर्देश दिए हैं कि टर्बुलेंस या खराब मौसम में पायलटों को पहले यात्रियों को अनाउंसमेंट से सूचित करना है. केबिन क्रू को भी समय पर जानकारी देनी है ताकि वे स्थिति संभाल सकें. पायलटों को टर्बुलेंस या मौसम की जानकारी तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल को देनी है ताकि बेहतर तालमेल और जागरूकता बनी रहे. पायलटों को मौसम की नियमित वेदर रिपोर्ट्स शेयर करने को भी कहा गया है।

पायलटों की ट्रेनिंग पर जोर

DGCA ने ऑपरेटर्स को निर्देश दिए हैं कि वे अपने पायलटों को खराब मौसम में फैसले लेने और जोखिम प्रबंधन की खास ट्रेनिंग दें. इसमें सिनेरियो-बेस्ड ट्रेनिंग शामिल होनी है ताकि पायलट हर चुनौती के लिए तैयार रहें. इस ट्रेनिंग का उद्देश्य पायलटों की स्किल्स को बेहतर करना और उड़ान को और सुरक्षित बनाना है।

ये नए नियम सभी शेड्यूल्ड और नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स और फ्लाइट क्रू पर लागू होंगे. खासकर प्री-मानसून, मानसून, खराब मौसम और टर्बुलेंस के दौरान इनका सख्ती से पालन करना है. DGCA का कहना है कि ये नियम भारतीय विमानन को और सुरक्षित बनाने का अहम कदम हैं।

Read more: Air India Emergency Landing: थाईलैंड में बम की धमकी से हड़कंप

Surekha Bhosle

लेखक परिचय

Surekha Bhosle

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।