मुंबई,। मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध की लपटें अब भारत की अर्थव्यवस्था (Indian economy) और आम जनजीवन को प्रभावित करने लगी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण देश के प्रमुख महानगरों में कमर्शियल एलपीजी गैस की भारी किल्लत पैदा हो गई है। इसका सबसे बड़ा झटका होटल और रेस्तरां उद्योग को लगा है।
अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारत पर
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) में स्थिति गंभीर होती जा रही है। होटलों की प्रमुख संस्था आहार के अनुसार, गैस की कमी के चलते मुंबई के लगभग 20 प्रतिशत होटल पहले ही बंद हो चुके हैं।
48 घंटे में हालात और बिगड़ने की आशंका
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो शहर के 50 प्रतिशत से अधिक होटलों पर ताला लग सकता है। हालांकि, एसोसिएशन ने अभी तक सामूहिक रूप से होटल बंद करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन ईंधन के अभाव में व्यक्तिगत स्तर पर होटल मालिक परिचालन बंद करने को मजबूर हैं।
चेन्नई में भी गहराया गैस संकट
वहीं, दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई (Chennai) में भी हाहाकार मचा हुआ है। चेन्नई होटल एसोसिएशन ने शहर में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
दो दिन का ही बचा गैस स्टॉक
एसोसिएशन का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा कमर्शियल गैस की आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोकने की सूचना ने खाद्य उद्योग के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। चेन्नई होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष एम. रवि ने बताया कि अधिकांश होटलों के पास अब केवल दो दिनों का स्टॉक बचा है।
आम लोगों पर पड़ सकता है बड़ा असर
उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि होटल उद्योग केवल व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह अस्पतालों, आईटी पार्कों, कॉलेज हॉस्टलों और ट्रेन यात्रियों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत है। यदि सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो आम जनता को खाने-पीने की भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा।
ऊर्जा संकट से सेवा क्षेत्र चिंतित
भू-राजनीतिक तनाव के कारण उपजे इस ऊर्जा संकट ने पूरे देश के सेवा क्षेत्र को चिंता में डाल दिया है।
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