मुख्य बातें: –
- उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम बना तीसरा राज्य
- बहुविवाह प्रथा पर रोक लगाने का प्रस्ताव
- बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार देने की तैयारी
Assam UCC Bill : गुवाहाटी। असम सरकार ने राज्य की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम उठाते हुए विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश कर दिया है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम ऐसा तीसरा राज्य बन गया है, जहां यूसीसी लागू करने की दिशा में औपचारिक पहल की गई है।
यूसीसी विधेयक में क्या हैं बड़े प्रावधान
सरकार के अनुसार, इस विधेयक को असम की जनसांख्यिकीय विविधता और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।विधेयक में बहुविवाह प्रथा पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा विवाह की न्यूनतम कानूनी उम्र को सख्ती से लागू करने, सभी शादियों और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण कराने और बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार देने की बात कही गई है। सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप (Live In Relationship) को लेकर भी सख्त नियम प्रस्तावित किए हैं, जिसके तहत ऐसे रिश्तों का सरकारी पंजीकरण अनिवार्य होगा।
विधानसभा में विपक्ष का हंगामा
विधेयक पेश होते ही विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इस कानून को लागू करने से पहले सभी समुदायों और संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए थी।कांग्रेस विधायक जाकिर हुसैन सिकंदर ने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी ला रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेगी।
सीएम हिमंत सरमा ने दी सफाई
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह कानून किसी भी धर्म की पूजा पद्धति और पारंपरिक रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उन्होंने लोगों की आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि धार्मिक परंपराएं यूसीसी के दायरे से बाहर रहेंगी। सरकार ने पहाड़ी और मैदानी इलाकों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को भी इस कानून के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया है।
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सरकार बोली- चुनावी वादा पूरा कर रहे
सत्ताधारी दल का कहना है कि यूसीसी लागू करना जनता से किया गया वादा था और सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार का दावा है कि यह कानून सामाजिक समानता और पारदर्शिता को बढ़ावा देगा।
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