बिना स्नान लौटना पड़ेगा, यह सोचा नहीं था
जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने माघ मेला छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य से वे माघ मेले में आए थे, वह पूरा नहीं हो सका।
कराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही इस पावन स्थल से विदा ले रहे हैं। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। श्रद्धा के साथ यहां आया था, लेकिन एक ऐसी घटना हो गई, जिसकी उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी।
उन्होंने कहा- यह घटना न केवल हमारी आत्मा को झकझोरने वाली है, (Magh Mela) बल्कि न्याय और मानवता के प्रति हमारे सामूहिक विश्वास पर भी गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। जो कहना था, वह वे कह चुके हैं, लेकिन एक बात साफ करना जरूरी है कि कल प्रशासन की ओर से उन्हें एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया था।
अन्य पढ़े: Bihar- सरकारी स्कूलों में बदला पढ़ाने का तरीका, डायरी में लिखनी होगी पूरी प्लानिंग
इसमें कहा गया था कि उन्हें पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर अधिकारियों की मौजूदगी में स्नान कराया जाएगा, लेकिन मन बहुत दुखी है, इसलिए जा रहा हूं। जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता।
अब तक क्या हुआ
- 18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पुलिस ने पालकी रोकी। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, शिखा पकड़कर घसीटने का आरोप लगा। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। 11दिनों से शिविर में प्रवेश नहीं किया है।
- प्रशासन ने दो दिनों में दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहा, जिससे विवाद और गहरा गया। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी।
- शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया, जबकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। शंकराचार्य की मांग है कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। शंकराचार्य के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे बाद सीएम के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने रिजाइन कर दिया।
अन्य पढ़े: