नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान चीन और पाकिस्तान (China and Pakistan) के बीच मजबूत गठजोड़ सामने आया। पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रिंगला (Harshvardhan Shringla) ने इसे गहरी रणनीतिक साझेदारी बताते हुए कहा कि दोनों देशों का सहयोग केवल रक्षा आपूर्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खुफिया और कूटनीतिक समर्थन तक पहुंच गया है।
भारत के उभरने को रोकने की ‘सदाबहार साझेदारी’
श्रिंगला के अनुसार, चीन-पाकिस्तान गठबंधन का उद्देश्य भारत के उत्थान को रोकना है। यह गठबंधन अब एक “सदाबहार रणनीतिक साझेदारी” के रूप में विकसित हो चुका है।
पुणे में हुई चर्चा में खुलासा
पूर्व विदेश सचिव श्रिंगला ने यह बातें पुणे इंटरनेशनल सेंटर द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में कहीं।
- उन्होंने भारत की विदेश नीति, रणनीतिक दृष्टिकोण और वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर विचार रखे।
- इस कार्यक्रम का संचालन चीन में भारत के पूर्व राजदूत गौतम बंबावाले ने किया।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
- मई 2024 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया।
- यह कदम 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 पर्यटकों की हत्या हुई थी, का जवाब था।
- 6-7 मई की रात भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में बहावलपुर, मुरीदके और मुजफ्फराबाद समेत 9 आतंकी ठिकानों पर प्रिसिजन मिसाइलें दागीं।
- इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और भारत का जवाब
- पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, लेकिन भारत ने उसके 11 एयरबेस और रडार सिस्टम को निशाना बनाकर तबाह कर दिया।
- इस दौरान पाकिस्तान द्वारा चीनी हथियारों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठे।
भारत की विदेश नीति: यथार्थवाद और आदर्शवाद का संतुलन
श्रिंगला ने कहा कि भारत की विदेश नीति यथार्थवाद और आदर्शवाद के बीच संतुलन बनाती है।
- यह नीति विकासात्मक जरूरतों, रणनीतिक स्वायत्तता और समावेशी दृष्टिकोण पर आधारित है।
- ऑपरेशन सिंदूर ने चीन-पाकिस्तान के गठबंधन की गहराई और भारत की सामरिक प्रतिक्रिया क्षमता को उजागर किया।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
भारतीय सशस्त्र सेनाओं और सीमा सुरक्षा बल (बॉर्डर सिक्योरिटी फॉर्स) द्वारा 6-7 मई की रात को पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में किए गए एक सैन्य हवाई अभियान का कूटनाम (कोडनेम) है।
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