लखनऊ । 23 दिसंबर 2025 की शाम कुशीनगर में भाजपा और अन्य दलों के करीब 52 ब्राह्मण विधायक और एमएलसी एक विशेष बैठक में जुटे। बैठक पीएन पाठक के आवास पर आयोजित की गई थी और इसमें केवल ब्राह्मण नेता ही शामिल थे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Cm Yogi Adityanath) से ब्राह्मण समुदाय नाराज चल रहा है, और यह बैठक उनकी नाराजगी और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा के उद्देश्य से बुलाई गई थी ।
2027 विधानसभा चुनाव और जातीय समीकरण पर मंथन
यह घटना 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और जातीय समीकरण को लेकर सियासी हलचल पैदा कर गई है। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय संख्या में 12–14 प्रतिशत होने के बावजूद 100 से ज्यादा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। पूर्वी यूपी, मध्य यूपी, बुंदेलखंड (Bundelkhand) और पश्चिमी क्षेत्रों में उनका प्रभाव विशेष रूप से महसूस किया जाता है।
लोकसभा चुनाव में झटका, भाजपा की बढ़ी चिंता
पिछली दो विधानसभा चुनावों में बीजेपी (BJP) ने जातीय समीकरण का लाभ उठाया था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में हल्का झटका मिला। इस कारण से ब्राह्मणों की नाराजगी भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गई है।
‘घुसखोर पंडत’ वेब सीरीज से भड़का ब्राह्मण समाज
इस राजनीतिक संवेदनशीलता के बीच, नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘घुसखोर पंडत’ के ट्रेलर ने ब्राह्मण समाज में आक्रोश पैदा कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत लखनऊ के हजरतगंज थाने में फिल्म निर्देशक नीरज पांडे और उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया और ट्रेलर हटाने को कहा।
एफआईआर के बाद ट्रेलर वापस, विवाद थमा
अभिनेता मनोज बाजपेयी और निर्देशक ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रचार सामग्री वापस ले ली।
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ब्राह्मण वोट बैंक बना चुनावी रणनीति की धुरी
विश्लेषकों का मानना है कि ये दोनों घटनाएं—ब्राह्मण विधायकों की बैठक और वेब सीरीज विवाद—यूपी की जातीय राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए जातीय संतुलन बनाए रखना और ब्राह्मण समुदाय की नाराजगी को शांत करना एक बड़ी रणनीतिक चुनौती बन गया है।
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