नई दिल्ली । जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत की गई गिरफ्तारी को रद्द करने के फैसले के बाद केंद्र सरकार की आलोचना तेज हो गई है। विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) ने इस फैसले को सरकार का “यू-टर्न” बताते हुए कहा है कि सरकार को वांगचुक के साथ-साथ लद्दाख के लोगों से भी माफी मांगनी चाहिए।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वांगचुक की गिरफ्तारी शुरू से ही गलत और तथ्यों पर आधारित नहीं थी। उन्होंने कहा कि लगभग छह महीने पहले जब यह कार्रवाई की गई थी, तब कांग्रेस ने इसका विरोध किया था और अब हिरासत रद्द होने से यह साबित हो गया है कि सरकार का फैसला सही नहीं था।
छह महीने बाद रद्द हुई हिरासत
केंद्र सरकार ने हाल ही में घोषणा की कि सोनम वांगचुक की **राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जा रहा है। वांगचुक को करीब छह महीने पहले लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए थे।
माफी और रिहाई की मांग
जयराम रमेश ने अपने बयान में कहा कि सरकार का यह नया फैसला उसके पहले के रुख से पूरी तरह विपरीत है। उन्होंने कहा कि अब सरकार को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए और सोनम वांगचुक तथा उनके परिवार से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि जिन लोगों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के कारण हिरासत में लिया गया था, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
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लोकतांत्रिक अधिकारों की बात
कांग्रेस का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार होता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और भविष्य में ऐसे मामलों में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मामला राष्ट्रीय राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकता है।
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