Delhi blast case : दिल्ली ब्लास्ट मामले में एनआईए को बड़ी सफलता मिली है। इस केस के अहम आरोपी यासिर अहमद डार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, आत्मघाती हमलावर उमर नबी को आतंक के रास्ते पर ले जाने में यासिर की अहम भूमिका रही है।
हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में, वह भी लाल किले जैसे हाई-सिक्योरिटी इलाके में हुए बम धमाके ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। जांच में सामने आया है कि इस हमले के पीछे एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क सक्रिय था। बताया जा रहा है कि 2022 से पहले ही इस हमले की योजना बनाई जा चुकी थी।
एनआईए जांच के अनुसार, उमर नबी पाकिस्तान (Delhi blast case) स्थित हैंडलर उकाशा के निर्देश पर 2022 में तुर्की गया था। वहां उसने सीरियाई आतंकियों से मुलाकात की और बड़े आतंकी हमलों की योजना पर चर्चा की। तुर्की से लौटने के बाद ही उमर ने फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया।
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जांच में यह भी सामने आया है कि इस हमले में विदेशी हैंडलर, कट्टरपंथीकरण के रास्ते और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। उमर नबी के साथ डॉक्टर मुजम्मिल, डॉक्टर आदिल और डॉक्टर मुजफ्फर राथर भी तुर्की गए थे। वहां सीरियाई हैंडलरों ने उन्हें बड़े ऑपरेशन में शामिल होने के निर्देश दिए।
गिरफ्तार आरोपी यासिर अहमद डार ने न केवल उमर नबी को पनाह दी, बल्कि उसे आत्मघाती हमले के लिए मानसिक रूप से तैयार भी किया। अधिकारियों के अनुसार, उमर नबी द्वारा हमले को ‘बलिदान’ मानने के पीछे भी यासिर की भूमिका थी।
एनआईए के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में JM–अंसार उल गजवत–उल हिंद मॉड्यूल ने भारत में हमास जैसे हमलों को अंजाम देने की साजिश रची थी। ड्रोन हमले, कार बम और आत्मघाती हमलावरों के जरिए कई शहरों को निशाना बनाने की योजना थी। इस मॉड्यूल से यासिर अहमद डार के करीबी संबंध होने की पुष्टि हुई है।
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