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BRICS- ब्रिक्स बैठक में बढ़ा कूटनीतिक तनाव, ईरान-यूएई विवाद में रूस को करना पड़ा हस्तक्षेप

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: May 15, 2026 • 12:02 PM
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नई दिल्ली,। राजधानी में आयोजित ब्रिक्स देशों (Brics Country) के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच तीखा कूटनीतिक टकराव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में हाल ही में हुए 40 दिवसीय संघर्ष को लेकर दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच जमकर बहस हुई, जिसके बाद बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने यूएई पर आरोप लगाया कि उसने अमेरिका और इजरायल को ईरान के खिलाफ अपने सैन्य ठिकाने, हवाई क्षेत्र और खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई। ईरान का कहना है कि उसने यूएई पर हमला नहीं किया, बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को आत्मरक्षा में निशाना बनाया था।

यूएई ने आरोपों को किया खारिज

दूसरी ओर (United Arab Emirates) ने ईरान के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। यूएई का दावा है कि ईरान ने उसके ऊर्जा ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को सीधे निशाना बनाया। तनाव उस समय और बढ़ गया जब इजरायल के प्रधानमंत्री और यूएई के राष्ट्रपति के बीच कथित गुप्त बैठक की खबरें सामने आईं। हालांकि यूएई ने ऐसी किसी भी मुलाकात से साफ इनकार किया।

रूस ने संभाला मामला

बैठक में माहौल इतना गर्म हो गया कि रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov को हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराना पड़ा। रूस की मध्यस्थता के बाद स्थिति कुछ सामान्य हुई, लेकिन मतभेद इतने गहरे रहे कि ब्रिक्स समूह पश्चिम एशिया संकट पर कोई साझा बयान जारी नहीं कर सका।

भारत ने शांति और कूटनीति पर दिया जोर

मेजबान देश भारत ने पूरे मामले में संयम और कूटनीति का संदेश दिया। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी देशों से संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम करने की अपील की।

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40 दिन के युद्ध से बढ़ा संकट

इस विवाद की पृष्ठभूमि 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए उस संघर्ष से जुड़ी है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। करीब 40 दिनों तक चले इस संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ा दी और कई देशों की अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला।

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