नई दिल्ली, 23 जुलाई 2025: भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद, भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) ने इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य है, इसलिए यह प्रक्रिया 19 सितंबर 2025 से पहले पूरी की जाएगी। आइए, विस्तार से जानते हैं कि उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है और इसके नियम क्या हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव की संवैधानिक व्यवस्था
उपराष्ट्रपति का चुनाव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत होता है। इसके अनुसार:
– उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के सदस्य शामिल होते हैं।
– इसमें लोकसभा के 543 और राज्यसभा के 245 (233 निर्वाचित + 12 मनोनीत) सदस्य होते हैं, यानी कुल 788 मतदाता।
– राष्ट्रपति चुनाव से अलग, राज्य विधानसभाओं के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते।
चुनाव की प्रक्रिया और नियम
उपराष्ट्रपति के चुनाव को उपराष्ट्रपति (चुनाव) नियम, 1974 के तहत संचालित किया जाता है। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है:
1. चुनाव की अधिसूचना
– निर्वाचन आयोग चुनाव की शुरुआत एक अधिसूचना जारी करके करता है।
– इसमें नामांकन दाखिल करने, नामांकन की जांच, उम्मीदवारी वापस लेने और मतदान की तारीख (यदि जरूरी हो) जैसी महत्वपूर्ण तिथियां शामिल होती हैं।
– यह अधिसूचना पर्याप्त समय देने के लिए पहले ही जारी कर दी जाती है।
2. उम्मीदवार की योग्यता
उम्मीदवार को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होती हैं:
– भारत का नागरिक हो।
– आयु कम से कम 35 वर्ष हो।
– सरकार के अधीन कोई लाभ का पद न धारण करता हो।
– राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
3. नामांकन प्रक्रिया
– उम्मीदवार को कम से कम 20 प्रस्तावक और 20 समर्थक (संसद सदस्य) चाहिए।
– नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर (आमतौर पर राज्यसभा का महासचिव) के पास जमा किया जाता है।
– नामांकन की जांच के बाद वैध उम्मीदवारों की सूची जारी होती है।
4. मतदान प्रक्रिया
– मतदान गुप्त मतपत्र के जरिए होता है और एकल हस्तांतरणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
– प्रत्येक मतदाता को एक वोट मिलता है, और वे अपनी प्राथमिकता के क्रम में उम्मीदवारों को अंक (1, 2, 3…) दे सकते हैं।
– जीत के लिए उम्मीदवार को कुल वैध मतों का 50% से अधिक या एक निश्चित कोटा प्राप्त करना होता है। कोटा की गणना होती है:
[(कुल वैध मत / (रिक्तियों की संख्या + 1)) + 1]।
– यदि पहली गिनती में कोई कोटा हासिल न करे, तो सबसे कम मत पाने वाले उम्मीदवार को हटाया जाता है और उनके मत दूसरी प्राथमिकता के आधार पर बांटे जाते हैं। यह तब तक चलता है जब तक कोई जीत न जाए।
5. परिणाम की घोषणा
– मतगणना के बाद, रिटर्निंग ऑफिसर विजेता की घोषणा करता है।
– निर्वाचन आयोग आधिकारिक तौर पर परिणाम जारी करता है।
निर्वाचन आयोग की भूमिका
निर्वाचन आयोग इस पूरी प्रक्रिया को संभालता है। इसके मुख्य कार्य हैं:
– अधिसूचना जारी करना और प्रक्रिया शुरू करना।
– नामांकन, मतदान और मतगणना की निगरानी करना।
– निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना।
– संविधान और नियमों का पालन सुनिश्चित करना।
– किसी भी विवाद का समाधान करना।
वर्तमान संदर्भ में चुनाव
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद निर्वाचन आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। गृह मंत्रालय ने इस्तीफे की अधिसूचना जारी कर दी है, और निर्वाचक मंडल की तैयारी, रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति जैसे काम शुरू हो गए हैं। जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होगी, और यह प्रक्रिया 19 सितंबर 2025 से पहले पूरी होगी।
निष्कर्ष
उपराष्ट्रपति का चुनाव भारत की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। यह न केवल संसद के सदस्यों की भागीदारी से होता है, बल्कि निर्वाचन आयोग की निगरानी में निष्पक्षता भी सुनिश्चित करता है। आने वाले दिनों में देश इस प्रक्रिया को करीब से देखेगा, जो राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होगी।
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