Dhaulpur में फर्जी IG का भंडाफोड़: नीली बत्ती वाली कार में घूम रहा था सुप्रियो मुखर्जी

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धौलपुर, राजस्थान: राजस्थान (Rajasthan) के धौलपुर जिले में पुलिस ने एक सनसनीखेज मामले में 45 वर्षीय सुप्रियो मुखर्जी (Supriyo Mukharji) को गिरफ्तार किया है, जो खुद को नेशनल सिक्योरिटी कॉप का अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक (IG) बताकर नीली बत्ती वाली कार में घूम रहा था।

यह शख्स पश्चिम बंगाल के हुगली जिले का निवासी है और अपनी पत्नी के साथ पंजाब की ओर जा रहा था, जब धौलपुर पुलिस ने ग्वालियर रोड पर चेकिंग के दौरान उसे पकड़ा। इस घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि यह पिछले तीन महीनों में पश्चिम बंगाल से जुड़ा दूसरा ऐसा मामला है, जिसमें कोई व्यक्ति फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर पकड़ा गया है

पुलिस की सतर्कता से खुला राज

धौलपुर के सर्किल ऑफिसर मुनेश मीना के नेतृत्व में पुलिस ने ग्वालियर रोड पर नियमित चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध कार को रोका। कार पर नीली बत्ती (बीकन) और ‘Government of India’ का लोगो लगा था। कार में सवार सुप्रियो मुखर्जी ने वर्दी पहन रखी थी, जिसमें कंधे पर तीन सितारे लगे थे, जो IG रैंक का प्रतीक है। उसने पुलिस को चार अलग-अलग पहचान पत्र दिखाए, जिसमें वह खुद को नेशनल सिक्योरिटी कॉप का IG बता रहा था। हालांकि, जब पुलिस ने दस्तावेजों की गहन जांच की, तो सभी आईडी कार्ड नकली पाए गए।

बरामद सामान ने उड़ाए होश

पुलिस ने सुप्रियो की कार की तलाशी ली, जिसमें दो मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक टैबलेट, और कई नकली हथियार बरामद हुए। इनमें एक एयर पिस्टल, एक एयर रिवॉल्वर और दो एयर राइफलें शामिल थीं, जो देखने में असली हथियारों जैसे लग रहे थे।

इसके अलावा, कार में नीली बत्ती और सरकारी निशान भी मिले, जिनका इस्तेमाल वह रौब जमाने और टोल टैक्स व चेकिंग से बचने के लिए करता था। पुलिस के अनुसार, सुप्रियो ने इन नकली गैजेट्स और वर्दी का उपयोग लोगों पर प्रभाव डालने, होटल में विशेष सुविधाएं हासिल करने और सड़क पर बेरोकटोक यात्रा करने के लिए किया

पूछताछ में खुलासा, मकसद रौब जमाना

पूछताछ में सुप्रियो ने कबूल किया कि वह नकली वर्दी, आईडी और नीली बत्ती का इस्तेमाल केवल रौब जमाने और सुविधाएं हासिल करने के लिए करता था। उसने बताया कि वह टोल टैक्स से बचने और पुलिस चेकिंग में आसानी के लिए इस फर्जीवाड़े का सहारा लेता था।

पुलिस को अभी तक उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं मिली है, लेकिन जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या उसने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल ठगी या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया। धौलपुर पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), और 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) के तहत मामला दर्ज किया है।

पहले भी सामने आए ऐसे मामले

यह कोई पहला मामला नहीं है। हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों, खासकर बिहार, पंजाब, और दिल्ली में फर्जी IPS और IAS अधिकारियों के पकड़े जाने की घटनाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, बिहार के जमुई में 18 वर्षीय मिथिलेश मांझी को 2 लाख रुपये देकर फर्जी IPS बनने के लिए ठगा गया था। इसी तरह, दिल्ली के पीतमपुरा में एक व्यक्ति को फर्जी सब-इंस्पेक्टर बनकर लोगों पर रौब जमाते पकड़ा गया था। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि फर्जी पहचान पत्र और वर्दी का उपयोग कर ठगी और प्रभाव जमाने का चलन बढ़ रहा है, जिस पर अंकुश लगाना जरूरी है।

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