7 अरब डॉलर में 11 ‘मोगामी-क्लास’ फ्रिगेट की डील
बीजिंग: चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता और प्रशांत महासागर में बढ़ती दादागिरी का मुकाबला करने के लिए जापान और ऑस्ट्रेलिया(Australia) ने एक ऐतिहासिक 7 अरब डॉलर के रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार के तहत जापान(Japan), ऑस्ट्रेलिया को 11 उन्नत ‘मोगामी-क्लास’ मल्टी-रोल फ्रिगेट (जंगी जहाज) उपलब्ध कराएगा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से हथियार निर्यात पर प्रतिबंध झेल रहे जापान के लिए यह एक बड़ा नीतिगत बदलाव है, जो उसके बदलते रक्षा परिदृश्य को दर्शाता है।
समझौते की मुख्य विशेषताएं
रणनीति: इस समझौते के तहत पहले तीन फ्रिगेट जापान की ‘मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज’ द्वारा तैयार किए जाएंगे, जिनकी आपूर्ति 2029 से शुरू होगी। शेष 8 फ्रिगेट ऑस्ट्रेलिया के हेंडरसन शिपयार्ड (पर्थ) में ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ के जरिए निर्मित किए जाएंगे।
क्षमता: मोगामी-क्लास फ्रिगेट दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, जंगी जहाजों को नष्ट करने और प्रभावी हवाई सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम हैं।
सुरक्षा गठबंधन: यह डील न केवल ऑस्ट्रेलिया और जापान के रक्षा संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि अमेरिका के साथ मिलकर चीन की विस्तारवादी नीतियों को रोकने के लिए एक बड़े इंडो-पैसिफिक गठबंधन का संकेत भी देती है।
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चीन के लिए चुनौती, भारत-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने स्पष्ट किया है कि इन जहाजों को हिंद और प्रशांत महासागर के उन संवेदनशील समुद्री मार्गों पर तैनात किया जाएगा, जहाँ चीनी नौसेना की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। ये फ्रिगेट न केवल समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा करेंगे, बल्कि उत्तरी ऑस्ट्रेलिया की रक्षा में भी अहम भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता जापान के शांतिवादी रुख से हटकर एक अधिक सक्रिय सुरक्षा भूमिका निभाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण काफी हद तक प्रभावित होंगे।
यह रक्षा समझौता जापान के लिए ऐतिहासिक क्यों माना जा रहा है?
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जापान ने अपने सैन्य निर्यात पर सख्त पाबंदी लगा रखी थी। हालाँकि 2014 में इसमें कुछ ढील दी गई थी, लेकिन यह पहली बार है जब जापान ने इतने बड़े स्तर पर किसी दूसरे देश को जंगी जहाज निर्यात करने का सैन्य समझौता किया है। यह जापान की अपनी रक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भरता कम करने और क्षेत्रीय सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने की नई नीति को दर्शाता है।
ऑस्ट्रेलिया इन युद्धपोतों का उपयोग किस प्रकार करेगा?
ऑस्ट्रेलिया इन 11 फ्रिगेट को हिंद और प्रशांत महासागर के उन क्षेत्रों में तैनात करेगा जहाँ चीनी सैन्य मौजूदगी का खतरा है। इन जहाजों को मुख्य रूप से समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा करने, दुश्मन की पनडुब्बियों और जहाजों को ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने तथा अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है।
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