Gaza NGO ban : गाजा में विस्थापित फिलिस्तीनी नागरिकों ने इज़राइल के नए फैसले को लेकर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों (NGOs) पर प्रतिबंध लगाया गया तो गाजा में मानवीय संकट और भी भयावह हो जाएगा।
खान यूनिस के निवासी सिराज अल-मसरी ने कहा, “हमारे पास न आय का कोई साधन है, न पैसा। इन सहायता संगठनों के बिना हमारा कोई विकल्प नहीं है। अगर ये चले गए तो हम कहां जाएंगे?”
इज़राइल ने डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF), नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल, CARE इंटरनेशनल और इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी समेत 37 अंतरराष्ट्रीय एनजीओ के लाइसेंस (Gaza NGO ban) रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इज़राइली सरकार का दावा है कि नए नियमों के तहत एनजीओ को अपने कर्मचारियों और गतिविधियों का विस्तृत ब्योरा देना होगा।
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गाजा के एक अन्य नागरिक रमज़ी अबू अल-नील ने कहा, “इन संगठनों की मौजूदगी के बावजूद हालात पहले ही बेहद खराब हैं। अगर इन्हें हटा दिया गया तो बच्चों की मौतें बढ़ेंगी और हजारों परिवार तबाह हो जाएंगे।”
इस फैसले के खिलाफ कनाडा, फ्रांस, जापान और ब्रिटेन सहित 10 देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर इज़राइल से आग्रह किया है कि वह गाजा में अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों को निर्बाध रूप से काम करने दे।
संयुक्त राष्ट्र की फिलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी UNRWA ने भी इस कदम की आलोचना की है। एजेंसी प्रमुख फिलिप लाज़ारिनी ने कहा कि यह फैसला मानवीय सहायता के सिद्धांतों को कमजोर करता है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के खिलाफ है।
गाजा सरकार के अनुसार, पिछले दो वर्षों के युद्ध में लगभग 500 सहायता कर्मियों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इज़राइल का यह कदम न केवल युद्धविराम समझौते बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना का भी उल्लंघन करता है।
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