धर्म की राह छोड़ने के संकेत
महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने धर्म और आध्यात्मिक जीवन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वह अब धर्म की राह से दूरी बना सकती हैं।
चरित्र पर सवाल उठाए जाने से आहत
“लड़की के चरित्र पर सवाल उठाना सबसे आसान”- हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) ने कहा कि समाज में किसी लड़की के चरित्र पर सवाल उठाना बेहद आसान होता है। बिना सच्चाई जाने लोग आरोप लगाने लगते हैं, जो मानसिक रूप से पीड़ादायक है।
महाकुंभ (Mahakumbh) से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने अब धर्म की राह छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने सोमवार को वीडियो जारी कर कहा, ‘महाकुंभ 2025 से शुरू हुई कहानी अब खत्म हो रही है।
इस एक साल में मैंने बहुत सारे विरोध का सामना किया है। अब मौनी अमावस्या के बाद धर्म के रास्ते को छोड़ूंगी और अपने पुराने प्रोफेशन में जाऊंगी। किसी लड़की के चरित्र पर सवाल उठना आसान नहीं है, लेकिन मैं सीता नहीं हूं कि जो अग्नि परीक्षा दूं।’
हर्षा रिछारिया अभी प्रयागराज माघ मेले में हैं। इस बार वह अपने भाई दीपक के साथ पहुंची हैं।
हर्षा रिछारिया ने क्या कुछ कहा, 4 पॉइंट में पढ़िए-
1- ‘मुझे बार-बार रोका गया, मनोबल तोड़ा गया’
हर्षा ने कहा- जय श्रीराम। एक साल में मैंने बहुत ज्यादा विरोध का सामना किया। यह विरोध प्रयागराज से शुरू हुआ। मुझे लगा था कि महाकुंभ होने के बाद यह सब खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैंने धर्म के रास्ते पर चलने की कोशिश की।
मैंने कोई गलत काम नहीं किया। न चोरी की, न कोई अनैतिक कार्य किया, न किसी के साथ अन्याय किया। फिर भी, जब-जब मैंने धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास किया, मुझे बार-बार रोका गया, मेरा मनोबल तोड़ा गया।
2- ‘मैं आज कर्ज में डूबी हुई हूं…’
हर्षा ने कहा- लोगों को लगा था कि धर्म को धंधा बनाकर करोड़ों कमा रही हूं। मगर ऐसा नहीं है। जो लोग आज धर्म को धंधा बनाकर करोड़ों रुपए कमा रहे हैं, उनके बीच मैं आज कर्ज में डूबी हुई हूं। पहले मैं एंकरिंग कर रही थी और मुझे अपने प्रोफेशन पर गर्व था। मैं गर्व से कह सकती हूं कि मैं अपना काम बहुत अच्छे से कर रही थी और उसमें खुश थी।
3- ‘मैं बेहद हताश हो गई हूं…’
हर्षा रिछारिया ने कहा- मैं देश से ज्यादा विदेशों में काम कर रही थी और अच्छा पैसा कमा रही थी। लेकिन यहां आने के बाद मेरे पास सिर्फ उधारी रह गई और कुछ भी नहीं बचा। सबसे दुखद बात यह है कि आज मेरे साथ कोई खड़ा नहीं है।
मैं आज यह सब इसलिए कह रही हूं, क्योंकि पिछले एक साल में मैंने जो भी करने की कोशिश की, उसे रोका गया, उसका विरोध किया गया और उसे तोड़ा गया। माघ मेले में भी मेरे साथ यही हुआ, जिससे मैं बेहद हताश हो गई।
मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया, जिसकी वजह से मेरा विरोध किया जाए। लेकिन शायद हमारे देश में किसी लड़की का विरोध करना, उसका मनोबल तोड़ना और उसके चरित्र पर सवाल उठाना बहुत आसान है।
4- ‘मैंने कई परीक्षाएं दीं, लेकिन अब बहुत हो गया’
पिछले एक साल में जितनी परीक्षाएं देनी थीं, मैंने दे दीं। अब बहुत हो गया। इस मौनी अमावस्या पर, माघ मेले में मैं स्नान करूंगी और उसी स्नान के साथ धर्म के मार्ग पर चलने का जो संकल्प लिया था, उसे पूर्ण विराम दूंगी। मैं वापस अपना पुराना काम करूंगी, वह काम जिसमें न कोई विरोध था, न चरित्र पर आक्षेप।
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अगर कोई युवा या कोई बहन मुझसे कहेगी कि उसे धर्म से जुड़ना है, धर्म के रास्ते पर चलना है, तो मैं बस यही कहूंगी- अपने परिवार के साथ जुड़कर रहो, अपने घर के मंदिर में पूजा करो। इसके अलावा किसी के पीछे मत जाओ।
हर्षा रिछरिया कौन है?
हर्षा रिछारिया के इंस्टाग्राम बायो में उन्हें एक एंकर, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में वर्णित किया गया है। वह अपनी पहचान निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की शिष्या के रूप में बताती हैं।
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