Supreme Court- संविदा कर्मचारियों को सरकारी कर्मियों के बराबर हक नहीं- सुप्रीम कोर्ट

Read Time:  1 min
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट
FONT SIZE
GET APP

नई दिल्ली,। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी बाहरी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से अनुबंध (Contract) पर नियुक्त कर्मचारी, सरकारी विभागों या निकायों के नियमित कर्मचारियों के बराबर समानता का दावा नहीं कर सकते।

सरकारी नौकरी सार्वजनिक संपत्ति: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अपने फैसले में सरकारी नौकरियों को सार्वजनिक संपत्ति करार देते हुए कहा कि नियमित नियुक्तियां एक पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से की जाती हैं, जिसमें देश के सभी योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर प्राप्त होता है।

कॉन्ट्रैक्ट और नियमित कैडर में कानूनी अंतर

अदालत ने जोर देकर कहा कि अनुबंध पर रखी गई मैनपावर और नियमित कैडर के बीच एक स्पष्ट कानूनी अंतर होता है। पीठ के अनुसार, किसी एजेंसी या ठेकेदार के जरिए नौकरी देना पूरी तरह से नियोक्ता की मर्जी पर निर्भर करता है, जबकि सरकारी पदों पर भर्ती के लिए संविधान के तहत निर्धारित सुरक्षा उपाय और प्रक्रियाएं होती हैं।

नियुक्ति पद्धतियों की पवित्रता बनाए रखना जरूरी

अदालत ने कहा कि यदि नियमित और अनुबंध कर्मचारियों के बीच का यह अंतर खत्म कर दिया गया, तो स्थायी, अनुबंध और तदर्थ (एडहॉक) जैसी विभिन्न नियुक्ति पद्धतियों का मूलभूत आधार ही समाप्त हो जाएगा।

आंध्र हाईकोर्ट का 2018 का आदेश रद्द

शीर्ष अदालत ने यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के 2018 के उस आदेश को रद्द करते हुए सुनाया, जिसमें नगर निगम में ठेकेदार के जरिए नियुक्त कर्मियों को नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और भत्ते देने का निर्देश दिया गया था।

हर नागरिक को सरकारी पद के लिए समान अवसर

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य प्राधिकार के तहत कोई भी पद सार्वजनिक संपत्ति है और हर नागरिक को उसके लिए आवेदन करने का संवैधानिक अधिकार है। नियमित नियुक्तियों में सुरक्षा उपाय इसलिए रखे जाते हैं ताकि चयन में कोई पक्षपात या बाहरी हस्तक्षेप न हो और भर्ती केवल योग्यता के आधार पर हो।

Read Also : PM-शौर्य यात्रा में पीएम मोदी का सांस्कृतिक संदेश, डमरू बजाकर किया अभिवादन

नंदयाल नगरपालिका परिषद से जुड़ा मामला

यह मामला आंध्र प्रदेश (Andhra pradesh) के कुरनूल जिले की नंदयाल नगरपालिका परिषद से जुड़ा था, जहां ठेकेदार के माध्यम से सफाई कर्मचारी नियुक्त किए गए थे। समय के साथ ठेकेदार बदलते रहे, लेकिन कर्मचारियों ने नियमित सेवा के लाभों की मांग की थी। अदालत ने अंततः माना कि कानून में इस तरह की समानता की अनुमति नहीं दी जा सकती

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कौन हैं?

वर्तमान में, न्यायमूर्ति सूर्यकांत (Justice Surya Kant) भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) हैं, जिन्होंने 24 नवंबर, 2025 को शपथ ली और न्यायमूर्ति भूषण आर. गवई (Bhushan R. Gavai) का स्थान लिया है; उनका कार्यकाल 9 फरवरी, 2027 तक होगा। 

Read More :

Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।