नई दिल्ली। रंगों के पर्व होली की शुरुआत आज होलिका दहन (Holika Dahan) के साथ होगी। देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ होलिका दहन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 12 बजे तक रहेगा, इसलिए भक्तजन निर्धारित समय के भीतर विधि-विधान से पूजा संपन्न करेंगे।होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भक्त प्रह्लाद की भक्ति और भगवान विष्णु की कृपा से होलिका दहन में दुष्टता का अंत हुआ था। इसी स्मृति में हर वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका जलाई जाती है।
क्या है शुभ मुहूर्त?
पंडितों के मुताबिक, भद्रा काल (Bhadra Period) समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना शुभ माना जाता है। इस बार रात तक का समय अनुकूल है। कई शहरों में सामूहिक रूप से निर्धारित समय पर होलिका दहन किया जाएगा।

होलिका दहन की पूजा विधि
- पूजन स्थल की तैयारी – जहां होलिका स्थापित की गई हो, वहां गोबर से लीपा हुआ स्थान तैयार करें।
- पूजा सामग्री – रोली, अक्षत, मौली, गुड़, हल्दी, गुलाल, नारियल, गेहूं की बालियां और जल का पात्र रखें।
- परिक्रमा – परिवार के साथ होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करें।
- अर्पण – नारियल, नई फसल की बालियां और मिठाई अर्पित करें।
- आरती और प्रार्थना – परिवार की सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों के नाश की कामना करें।
मान्यता है कि होलिका की अग्नि में नई फसल की बालियां सेंककर खाने से समृद्धि आती है और रोग-शोक दूर होते हैं।
होली से जुड़ी खास परंपराएं
देश के अलग-अलग हिस्सों में होली की परंपराएं अलग-अलग हैं। उत्तर भारत में होलिका दहन के अगले दिन रंगों की धूम रहती है, वहीं ब्रज क्षेत्र में लठमार होली और फूलों की होली प्रसिद्ध है। ग्रामीण इलाकों में लोग एक-दूसरे के घर जाकर अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देते हैं।
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सुरक्षा और सावधानियां
प्रशासन ने अपील की है कि होलिका दहन खुले और सुरक्षित स्थान पर करें। ज्वलनशील पदार्थों से दूरी बनाए रखें और बच्चों को आग से दूर रखें। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक (Plastic) या रबर जैसे हानिकारक पदार्थों को जलाने से बचें। होलिका दहन के साथ ही आज से रंगों के उत्सव की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। भक्तगण बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश लेकर कल रंगों के साथ होली का पर्व मनाएंगे।
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